नई दिल्ली - पंडित जवाहरलाल नेहरू की भांजी और सुप्रसिद्ध लेखिका नयनतारा सहगल ने मंगलवार को साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने की घोषणा की। उन्होंने केंद्र सरकार पर देश की सांस्कृतिक विविधता कायम न रख पाने का आरोप लगाया। 88 वर्षीय सहगल को 1986 में उनके अंग्रेजी उपन्यास ‘रिच लाइक अस’ के लिए अकादमी पुरस्कार दिया गया था। उन्होंने ‘अनमेकिंग ऑफ इंडिया’ शीर्षक से एक बयान जारी कर अपने निर्णय के बारे में बताया।
इसमें उन्होंने दादरी कांड के अलावा लेखक एमएम कलबुर्गी, समाजसेवी नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पनसारे की हत्याओं का जिक्र किया। एक समाचार चैनल से बातचीत में सहगल ने कहा, पीएम मोदी चुप्पी साधे हैं। पूरा देश चाह रहा है कि पीएम बयान दें, क्योंकि हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। अपने बयान में उन्होंने साहित्य अकादमी पर भी चुप्पी साधने का आरोप लगाया। गौरतलब है कि नयनतारा सहगल अपने राजनीतिक विचारों को बेबाक तरीके से व्यक्त करने के लिए जानी जाती रही हैं। उन्होंने वर्ष 1975-77 के दौरान इमरजेंसी लगाए जाने के खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाया था।