नई दिल्ली - जर्मनी भारत को हरित ऊर्जा गलियारे के विकास तथा सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए एक-एक अरब यूरो की सहायता देगा, जबकि भारत जर्मनी की कंपनियों को कारोबारी मंजूरियां दिलाने एवं झंझट से मुक्त करने के लिए फास्ट ट्रैक मंजूरी की सुविधा देगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल की मौजूदगी में भारत-जर्मनी अंतर सरकारी विमर्श की तीसरी शिखर बैठक में ये निर्णय लिए गए। एजेंला मर्केल रविवार शाम को तीन दिवसीय दौरे पर भारत पहंची थीं।
सोमवार को करीब तीन घंटे तक चली इस बैठक में भारत और जर्मनी ने अपने संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाते हुए कौशल विकास, रेलवे, विज्ञान एवं तकनीक, शिक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और कृषि समेत कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग के 18 करारों पर हस्ताक्षर किए। दोनों देशों ने जर्मन कंपनियों को भारत में कारोबार के लिए त्वरित सुविधा देने के लिए फास्ट ट्रैक प्रणाली स्थापित करने की भी घोषणा की। जर्मन भाषा को भारत में और आधुनिक भारतीय भाषाओं को जर्मनी में बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों ने एक करार किया। दोनों देशों ने सौर ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी सहयोग का करार किया।
भारत और जर्मनी ने कौशल विकास तथा व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए भी एक समझौता किया। इसके साथ ही दोनों देश सुरक्षा, उड्डयन सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भी सहयोग करेंगे। विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में आपसी सहयोग को आगे ले जाने के लिए दोनों देशों ने इंडो जर्मन साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेंटर की अवधि को बढ़ाने तथा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भागीदारी बढ़ाने का भी करार किया। भारत और जर्मनी ने साथ ही कृषि के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने का फैसला किया। रेल, विनिर्माण और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का भी करार किया।
श्री मोदी ने अपने मीडिया वक्तव्य में इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह जर्मनी द्वारा भारत के हरित ऊर्जा गलियारे के विकास के लिए एक अरब यूरो की सहायता देने तथा भारत में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विकास के लिए एक अरब यूरो के अलग पैकेज पर आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक तापमान रोकने के लिए हमें भी अपनी सोच बदलनी होगी।