नई दिल्ली - जैन पर्व पर्यूषण के दौरान मीट बिक्री पर से प्रतिबंध हटाने के बांबे हाई कोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से इनकार कर दिया है। गुरुवार को जस्टिस टीएस ठाकुर और जस्टिस कुरियन जोसफ की बैंच ने बैन थोपने के तरीके पर भी आपत्ति जताई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रतिबंध का विरोध कर रहे लोगों के बारे में अथॉरिटी का रवैया सहिष्णु होना चाहिए। बैंच जैन समुदाय के एक धार्मिक संगठन की ओर से बांबे हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
याचिका में कहा गया था कि अहिंसा की भावना हमारे संविधान द्वारा पोषित है और यह जानवरों की भलाई से जुड़ा मुद्दा भी है। याचिका में आगे कहा गया था कि जानवरों के प्रति भी दया का भाव रखना चाहिए और दुनिया के कई देश इस तरह के दर्शन में विश्वास रखते हैं। इसके जवाब में बैंच ने कहा कि दया की भावना सिर्फ पर्वों के दौरान क्यों दिखाई जानी चाहिए, क्या ऐसा हमेशा नहीं करना चाहिए?
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर सहमति जताई कि दुनियाभर में जानवरों के लेकर दया की भावना बढ़ रही है, लेकिन किसी भी तरह का बैन लोगों पर थोपा नहीं जा सकता है। बैंच ने कहा कि देश और दुनिया में ऐसा हो रहा है। सहिष्णुता की भावना बहुत जरूरी है और सुधार के जरिए समाज में इसे बढ़ावा देना होगा। कोर्ट ने कहा कि दया सिर्फ पर्वों के दौरान नहीं साल भर दिखाने की जरूरत है।