नई दिल्ली - भारत सरकार ने रविवार को कहा कि वह यमन में फंसे अपने नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए कदम उठा रही है। सरकार ने यह बयान तब दिया जब नाविकों के एक समूह ने दावा किया गुजरात के 70 नाविक संकट-ग्रस्त यमन में फंसे हुए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने दिल्ली में कहा, कि यमन (जिबूती स्थित कैंप ऑफिस) में हमारा मिशन हालात से वाकिफ है और भारतीयों को बचाने के लिए कदम उठा रहा है। गुजरात के रहने वाले करीब 70 नाविक पिछले 15 दिनों से ज्यादा समय से संकट ग्रस्त यमन में फंसे हुए हैं। नाविकों के एक समूह के मुताबिक, कच्छ के मांडवी गांव और जामनगर के जोडिया और सलाया गांवों के रहने वाले करीब 70 नाविक अपनी पांच मालवाहक नौकाओं के साथ यमन के खोखा पोर्ट पर फंसे हुए हैं। वे वहां माल पहुंचाने गए थे। यह ऐसे समय में हुआ है जब पिछले ही दिनों यमन में सऊदी अरब की अगुवाई में हुए हवाई हमलों की चपेट में आ जाने के कारण छह भारतीय नागरिक मारे गए थे।
इस बीच, यमन में फंसे एक नाविक की पहचान मांडवी गांव के सिकंदर के तौर पर हुई है। सिकंदर ने कल रात एक ऑडियो संदेश भेजा जिसमें उसने कहा कि कल रात उन पर बम से हमला किया गया। सिकंदर ने संदेश में कहा कि उन्होंने तीन रॉकेट दागे हैं और हम खुद को किसी तरह बचाने में सफल हुए। हम अपनी जान बचाने के लिए यहां-वहां भाग रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा था कि छह भारतीय उस वक्त मारे गए जब उनकी नौका आठ सितंबर को सऊदी अरब की अगुवाई में किए जा रहे हमलों की चपेट में आ गई थी। मारे गए नाविक उन सात भारतीय नागरिकों में शामिल थे जिन्हें शुरुआत में तब लापता बताया गया था जब 21 भारतीयों को लेकर जा रही दो नौकाएं ‘मुस्तफा’ और ‘अस्मार’ हवाई हमलों की चपेट में आ गई थी।
मंत्रालय ने कहा था कि शेष 15 भारतीयों में 14 हुदैदा में सुरक्षित हैं जबकि एक व्यक्ति अब भी लापता है। मंत्रालय ने यह भी कहा था कि उनका पता लगाने के लिए स्थानीय अधिकारियों से संपर्क किया जा रहा है।