मुंबइ - महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) की विशेष अदालत ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 11 जुलाई, 2006 को लोकल ट्रेन विस्फोट मामले में शुक्रवार को 12 लोगों को दोषी करार दिया, जबकि एक आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। सभी दोषियों को सोमवार को सजा सुनाई जाएगी। मुंबई की लोकल ट्रेनों में विभिन्न स्थानों पर हुए सात शक्तिशाली बम विस्फोटों में 187 लोग मारे गए थे और 817 लोग घायल हुए थे।
न्यायाधीश वाईडी शिंदे ने मामले की सुनवाई के बाद भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत 12 लोगों को दोषी करार दिया, जबकि एक आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। दोषी करार दिए गए लोगों में फैजल शेख, अली बशीर खान, मोहम्मद अली, माजिद शफी, साजिद अंसारी, कमाल अंसारी, इतेशम सिद्दीकी, जमीर शेख, सोहैल शेख, मुजम्मिल शेख, तनवीर अंसारी और नवीद हुसैन शामिल है। अब्दुल शेख को सबूतों के अभाव में अदालत ने बरी कर दिया। विशेष सरकारी वकील राजा ठाकरे ने अदालत के बाहर संवाददाताओं को बताया कि दोषी करार दिए गए आरोपियों को सोमवार को सजा सुनाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि मकोका की धारा 3 (01) (01) और भारतीय दंड विधान की धारा 302 के तहत आरोपियों की सजा तय की जाएगी। इन धाराओं के तहत मृत्युदंड का प्रावधान है। उल्लेखनीय है कि 11 जुलाई, 2006 को शाम 06.24 से 06.35 बजे के बीच 11 मिनट के अंतराल में मुंबई की उपनगरीय लोकल ट्रेनों के डिब्बों में सात शक्तिशाली बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 187 लोगों की मौत हुई थी और 817 लोग घायल हुए थे। बम विस्फोटों की जांच करने वाले आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) ने 13 लोगों को गिरफ्तार किया था। ये लोग कथित रूप से प्रतिबंधित स्टूडेंटस इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के सदस्य बताए गए थे।