लखनऊ - बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख तथा उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने आज कहा कि यह अफसोसजनक है कि केन्द्र में नरेन्द्र मोदी की सरकार का रिमोट कंट्रोल राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के हाथ में है और दोनों को आम लोगों की समस्याओं से कोई लेना-देना नहीं है। सुश्री मायावती ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आरएसएस के सामने समर्पण कर दिया है और उनके इशारे पर नाच रहे हैं, क्योंकि सरकार का रिमोट कंट्रोल आरएसएस ने अपने पास रखा है। उन्होंने यहां जारी बयान में कहा कि केन्द्र सरकार को संविधान और देश की जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिये, लेकिन अफसोस है कि प्रधानमंत्री तथा केन्द्रीय मंत्री आरएसएस के प्रति जवाबदेह है तथा अपने कामकाज की रिपोर्ट आरएसएस को देते हैं।
आरएसएस केन्द्र सरकार के कामकाज पर पूरे नंबर देता है, जो अपने आप में क्रूर मजाक है। मोदी सरकार को अपने काम पर नंबर जनता से लेने चाहिये आरएसएस से नहीं, क्योंकि श्री मोदी को जनता ने चुना है आरएसएस ने नहीं। बसपा प्रमुख ने भारतीय जनता पार्टी को याद दिलाया कि पार्टी हमेशा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की इस बात के लिये आलोचना किया करती थी कि सरकार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के निवास दस जनपथ के इशारे पर चल रही है। अब श्री नरेन्द्र मोदी की सरकार भी आरएसएस के इशारे पर चल रही है। श्री मोदी भी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के रास्ते पर ही चल रहे हैं। दोनों सरकारों में कोई फर्क नहीं है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने जनप्रतिनिधियों के खिलाफ लिखने बोलने पर देशद्रोह का मुकदमा करने जैसा नया परिपत्र जारी किया है।
यह भाजपा के हिटलरशाही चरित्र को उजागर करता है, लिहाजा सभी को इसका विरोध करना चाहिये। सुश्री मायावती ने पूर्व सैनिकों के लिये वन रैंक वन पेंशन पर भी सवाल उठाया और कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव को देखते हुए इसे जल्दबाजी में लागू किया जा रहा है। पूर्व सैनिक पिछले तीन महीने से दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना दे रहे हैं, लेकिन सरकार को उनसे बात करने की सुध भी नहीं आयी। सरकार ने इसे आधे मन से लागू किया जिसे लेकर सैनिकों में असंतोष है। बसपा प्रमुख ने बिहार के बोध गया को अंतर्राष्ट्रीय पटल पर आगे लाने के लिये केन्द्र सरकार से वहां सुविधाओं की बहाली की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कल बोध गया गये, लेकिन इलाके के विकास के लिये कोई घोषणा नहीं की।