नई दिल्ली - वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वन रैंक-वन पेंशन को लेकर आंदोलनरत पूर्व सैनिकों की मांग को सोमवार को एक प्रकार से खारिज करते हुए कहा कि पेंशन में हर साल संशोधन नहीं किया जा सकता। जेटली ने कहा कि दुनिया में कहीं भी हर साल पेंशन में संशोधन नहीं होता है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ओआरओपी के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन केवल एक मुश्किल है और वह है उसका गणितीय जमा घटा। उन्होंने कहा कि ओआरओपी का मतलब क्या है? इसके लिए मेरा अपना फार्मूला है। किसी और का ओआरओपी पर अपना फार्मूला हो सकता है, लेकिन यह तार्किक मापदंडों के अनुरूप होना चाहिए। आप ऐसा ओआरओपी नहीं लागू कर सकते, जहां पेंशन हर महीने या हर साल संशोधित होती हो।
वित्त मंत्री ने साथ ही कहा कि सरकारी कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें जल्द ही आएंगी। जेटली ने कहा कि मैं पैसे को लेकर बेहद सतर्क रहता हूं और इसलिए मेरा काम वास्तव में एक गृहिणी की तरह है, जिसे घर में खर्च होने वाले एक-एक पैसे का हिसाब-किताब रखना पड़ता है, ताकि आप जरूरत से अधिक खर्च न कर दें और उसके बाद उधार मांगें और यदि आप एक सीमा से अधिक उधार मांगते हैं तो आप वित्तीय अनुशासनहीनता में शामिल होते हैं। पूर्व सैनिक वन रैंक-वन पेंशन की अपनी मांग को लेकर पिछले 78 दिनों से यहां जंतर-मंतर पर धरना दे रहे हैं। उनकी मांगों में पेंशन में सालाना संशोधन भी शामिल है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि हम सिद्धांत (ओआरओपी) को स्वीकार करते हैं।
हम सिद्धांत को लागू करेंगे, लेकिन ऐसा माहौल नहीं बनाना चाहिए, जहां समाज के अन्य वर्ग भी इसी प्रकार की मांगें रखना शुरू कर दें। उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीतिक विचार प्रक्रिया जो तार्किक तरीके से सोचती है, वह केवल भावनाओं के आधार पर अतार्किक रियायत नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कदम से अन्य वर्गों के लिए एक रवायत हो जाएगी और वे इसी प्रकार के लाभों की मांग कर सकते हैं। जेटली ने कहा कि क्या बीएसएफ इसे कर सकता है? क्या सीआरपीएफ ऐसा कर सकता है? जाहिर सी बात है कि विवेकवान भारत कहेगा कि यह सही कदम नहीं है। आप कोई ऐसा कदम नहीं उठा सकते, जिसका खामियाजा आने वाली पीढिय़ों को भुगतना पड़े। इसलिए तार्किक आधार पर निश्चित रूप से हम ओआरओपी को लागू करने में सक्षम होंगे।