अहमदाबाद - पटेल समुदाय की तरफ से ओबीसी (अदर बैकवर्ड क्लास) के दर्जे की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शन के बीच मंगलवार को गुजरात के कुछ हिस्से में हिंसक झड़पें शुरू हो गईं। अहमदाबाद में पथराव की दो घटनाएं सामने आई हैं, वहीं राज्य के कुछ हिस्से में जबरन दुकान बंद करवाने के दौरान पुलिस ने पटेल समुदाय के लोगों पर लाठियां भाजी हैं। पाटीदार अनामत (आरक्षण) आंदोलन समिति के नेता हार्दिक पटेल (21) के अनिश्चतकालीन अनशन शुरू करने के बीच यह हिंसक झड़पें हुई हैं। हार्दिक ने अहमदाबाद में प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि 20 लाख से अधिक पाटीदार मंगलवार को यहां जमा हुए हैं, ताकि सुप्रीम कोर्ट हम पर कुछ ध्यान दे।
हम अपने सम्मान और परंपरा को बचाने के लिए आरक्षण चाहते हैं। हमें आरक्षण का अधिकार है और वैसा ही हमारे बच्चों का भी है। गुजरात की 12 फीसदी आबादी पटेलों की है और यह आर्थिक रूप से संपन्न समुदाय है। राज्य में 15 फीसदी आरक्षण एसटी (शेड्यूल ट्राइब्स), 7.5 फीसदी एससी (शेड्यूल कास्ट) और 27 फीसदी ओबीसी को मिला हुआ है। जहां तक ओबीसी की बात है तो राज्य में 146 समुदाय इसके अंतर्गत आते हैं, पटेल भी इस लिस्ट में खुद को शामिल किए जाने की मांग कर रहे हैं। उनकी इस मांग का ओबीसी में शामिल अन्य समुदाय के लोग विरोध कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि इससे उनका कोटा कम हो सकता है। पटेल वोटबैंक के लिहाजा से महत्त्वपूर्ण हैं और इसे देखते हुए गुजरात सरकार बेहद सावधानी से इस मुद्दे का हल करना चाहती है।
शायद इसलिए मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने कहा कि आप संवैधानिक प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अवगत हैं। हम एससी, एसटी, और ओबीसी को 50 फीसदी से अधिक आरक्षण नहीं दे सकते। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री, राज्य बीजेपी अध्यक्ष आर सी फालदू और कैबिनेट के सात अन्य सदस्य पटेल समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। गुजरात में पटेल समाज के लिए आरक्षण की मांग को लेकर मुहिम चलाने वाले हार्दिक पटेल को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। बताया जा रहा है कि गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में जिस मैदान में पटेल समाज के लोगों ने रैली और प्रदर्शन किया वह मैदान खाली कराने के लिए पुलिस ने कार्रवाई की है और लाठीचार्ज का प्रयोग किया है। पुलिस का कहना है कि अनुमति से ज्यादा ठहरने की वजह से कार्रवाई की गई है। इससे पहले अहमदाबाद में आरक्षण की मांग को लेकर पटेल समुदाय के लोगों की महारैली ने राज्य सरकार को मुश्किल में डाल दिया था। इस रैली में लाखों लोगों की भीड़ जुटी थी।