नई दिल्ली - सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक पैसे का भुगतान न कर पाने के कारण पिछले डेढ़ साल से तिहाड़ जेल में बंद सहारा समूह के मुखिया सुब्रत राय की मुसीबतें बढ़ती नजर आ रही हैं। पूंजी बाजार नियामक सेबी ने बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर सहारा की देश और विदेश स्थित संपत्तियों को बेचने के लिए रिसीवर नियुक्त किए जाने की मांग की है। इसमें कहा गया है कि पैसे जमा कराने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू होने के लिए ऐसा करना जरूरी है। शीर्ष अदालत के आदेश के मुताबिक सहारा की दो कंपनियों को निवेशकों को लौटाने के लिए करीब 36,000 करोड़ रुपये की रकम सेबी के खाते में जमा कराने हैं।
कोर्ट ने जेल में बंद सुब्रत राय और समूह के दो अन्य निदेशकों की रिहाई के लिए भी 10,000 करोड़ रुपये जमा कराने की शर्त लगा रखी है। यह रकम 36,000 करोड़ में ही शामिल है। सहारा अभी तक 10,000 करोड़ जमा कराकर अपने मुखिया व कंपनी के दो अफसरों को रिहा नहीं करा पाई है। सेबी ने मांग की है कि रिसीवर कोर्ट सहारा की देश और विदेश स्थिति चल व अचल संपत्तियों पर कब्जा लेकर उन्हें बेचे। इस रकम को सेबी सहारा रिफंड खाते में जमा कराए। इसके अलावा यह आदेश दिया जाए कि सुप्रीम कोर्ट के अलावा कोई भी अदालत संपत्तियों की जब्ती और बिक्री पर रोक नहीं लगाएगी। सेबी ने संविधान के अनुच्छेद 144 का हवाला देते हुए कहा है कि भारत स्थित सभी दीवानी व न्यायिक अथॉरिटीज इस कोर्ट की मदद करेंगे।
भारत सरकार के कैबिनेट सचिव व गृह सचिव और सभी राज्यों के मुख्य सचिव व डीजीपी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया जाए। सेवानिवृत्त न्यायाधीश बीएन अग्रवाल को रिसीवर द्वारा संपत्ति बेचे जाने तथा कोर्ट का आदेश लागू कराने की पूरी प्रक्रिया की निगरानी सौंपी जाए।