नई दिल्ली - वन रैंक-वन पेंशन (ओआरओपी) की मांग को लेकर अनशन कर रहे पूर्व सैनिकों ने कहा है कि यदि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे लागू करने की तिथि के बारे में उन्हें लिखित आश्वासन देते हैं तो वे अपना अनशन समाप्त करने को तैयार हैं। ओआरओपी की मांग को लेकर तीन पूर्व सैनिक पांच दिन से आमरण अनशन पर बैठे हैं, जबकि उनके 29 सहयोगी पिछले 66 दिन से क्रमिक अनशन कर रहे हैं। इसके अलावा देश भर में भी 70 जगहों पर पूर्व सैनिक अपनी मांग को लेकर धरना दे रहे हैं। पूर्व सैनिकों के संयुक्त संगठन के प्रवक्ता जेएस संधू ने गुरुवार को कहा कि पूर्व सैनिक अपनी सभी शर्तों पर डटे हुए हैं और वे न तो अपनी मांगों से पीछे हटेंगे और न ही इनमें किसी तरह की कमी को मानेंगे।
यदि प्रधानमंत्री उनकी सभी मांगों को मानते हुए लिखित आश्वासन देते हैं कि फलां तारीख से ओआरओपी लागू की जाएगी तो पूर्व सैनिक अपना अनशन तोड़ देंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूर्व सैनिक किसी भी मामले में समझौता करने को तैयार नहीं हैं। ब्रिगेडियर संधू ने कहा कि पूर्व सैनिक इस बात के लिए भी तैयार हैं कि यदि अभी सरकार के पास पर्याप्त राशि नहीं है तो सरकार पहले विधवाओं को बढ़ी हुई पेंशन का भुगतान करे, फिर जवानों को तथा सबसे अंत में अधिकारियों को बढ़ा हुआ पैसा दे, लेकिन इसमें किसी तरह की कमी को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा के साथ हुई बातचीत की भावना को ध्यान में रख कर ही अनशन किया जा रहा है और फिलहाल इसे तेज नहीं किया जा रहा।