नई दिल्ली - पाकिस्तानी आतंकी नावेद ने पोलीग्राफ टेस्ट में ऐसे कई बड़े खुलासे किए हैं, जो 23-24 अगस्त को होने वाली भारत-पाक की एनएसए मीटिंग में अहम मुद्दा बन सकते हैं। मोहम्मद नावेद उर्फ उस्मान ने कहा है कि पाकिस्तानी सेना तथा वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई के अफसर उसके शिविर में ट्रेनिंग देने के लिए आते थे और मुंबई हमलों का सरगना हाफिज सईद भी उसके शिविर में आया था। गत पांच अगस्त को सीमा सुरक्षा बल के काफिले पर हमले के बाद दबोचे गए आतंकवादी नावेद से राष्ट्रीय जांच एजेंसी गहन पूछताछ कर रही है । एनआईए ने उसका पोलीग्राफी टेस्ट भी कराया है।
जांच एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार पूछताछ के दौरान उसने बताया कि उसने छह-सात जून को लश्कर-ए-तोएबा के तीन अन्य आतंकवादियों के साथ तंगमार्ग क्षेत्र की नूरी चौकी से कश्मीर में घुसपैठ की थी। इन सभी को लश्कर के एक अन्य आतंकवादी ने कासिम से मिलाया। नावेद और तीनों अन्य आतंकवादी लगभग दो महीने तक जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग क्षेत्रों में रहे और उन्होंने इन इलाकों की टोह लेने के साथ साथ आतंकी हमले की योजना बनाई। उसने उन्हें पनाह देने वाले स्थानीय लोगों के नाम भी जांच एजेंसियों को बताए हैं। उसने बताया कि वह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के फैसलाबाद जिला के टोंकियांवाली क्षेत्र में स्थित रफीक कालोनी का रहने वाला है और उसके पिता का नाम मोहम्मद याकूब है। नावेद ने बताया कि उसने मर्कजी खैबर स्थित आतंकवादी शिविर में तीन महीने तक ट्रेनिंग ली। इस शिविर में 20 से 25 लश्कर आतंकियों को ट्रेनिंग दी गई।