नई दिल्ली - लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर संसद की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि मानसून सत्र के दौरान उनका सदन में नहीं आना उनके अहंकार को दर्शाता है, जो लोकतंत्र के लिए नुकसानदेह है। श्री खडग़े ने कहा कि कांग्रेस पार्टी मानसून सत्र को सुचारू ढंग से चलाना चाहती थी, लेकिन सरकार ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। पूरे सत्र के दौरान विपक्ष की ओर से ललित मोदी प्रकरण और व्यापम घोटाले का मुद्दा उठाया गया, लेकिन इस पर प्रधानमंत्री अपनी सफाई देने सदन में नहीं आए, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकार को संसद की कार्यवाही चलाने में कोई दिलचस्पी नहीं थी।
कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री के सदन में नहीं आने से साबित होता है कि वह संसद का कितना सम्मान करते हैं। एक तरफ वह लोकतंत्र का दमन करते हैं और दूसरी तरफ जिन मंत्रियों पर आरोप है उन्हें संरक्षण दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का काम मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा करना है, लेकिन वह विपक्ष की मांग को ही नहीं सुन रहे हैं। यह अहंकार की इंतेहा है। कांग्रेस इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने वित्त मंत्री अरुण जेटली को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जिस तरह से वह सदन में कानून के भगोड़े ललित मोदी का बचाव कर रहे थे, उससे लग रहा था कि वह मंत्री नहीं, बल्कि ललित मोदी के वकील हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ललित मोदी को अपराधी नहीं मानती है। जब कार्रवाई करने वाला ही ऐसा करेगा तो अपराधी का संरक्षण होगा और लोगों को न्याय नहीं मिलेगा। श्री खडग़े ने कहा कि ललित मोदी प्रकरण में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से कांग्रेस ने जो सवाल पूछे थे उन्होंने उनमें से किसी का जवाब नहीं दिया गया, बल्कि 25-30 साल पुराने भोपाल गैस त्रासदी जैसे मामलों को उठाया जो मामला काफी पहले ही समाप्त हो चुका है।
उन्होंने कहा कि सरकार की उपेक्षापूर्ण नीति के कारण ही कांग्रेस को सदन से वॉकआउट करना पड़ा। उन्होंने कांग्रेस का साथ देने वाले तृणमूल कांग्रेस, वामपंथी दल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, समाजवादी पार्टी, मुस्लिम लीग और जनता दल (यू) को भी धन्यवाद दिया। इससे पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और श्री खडग़े के नेतृत्व में कांग्रेस के सांसदों ने संसद भवन परिसर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के निकट प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री से ललित मोदी प्रकरण तथा व्यापम घोटाले में बयान देने की मांग की। वे हाथों में तख्तियां लिए हुए थे, जिसमें श्रीमती स्वराज और व्यापम घोटाले के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई थी। प्रदर्शन कांग्रेस के लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों के अलावा वामपंथी दलों और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सदस्य भी शामिल थे।