नई दिल्ली - विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आज लोकसभा में ललित मोदी विवाद पर हो रही चर्चा के विपक्ष के नेता मल्लिकार्जून खड़गे के सवालों का जवाब देते हुए सुषमा ने ना सिर्फ अपना पक्ष रखा बल्कि कांग्रेस और राहुल गांधी पर जबरदस्त हमला बोला है। उन्होने यह भी साफ किया की उनके पति स्वराज कौशल इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के पूर्व प्रमुख ललित मोदी के पासपोर्ट मामले में उनके वकील नहीं थे। उन्होंने ब्रिटिश सरकार द्वारा ललित को यात्रा दस्तावेज जारी करने में अपनी गलती से इंकार किया।
लोकसभा में ललित मोदी मुद्दे पर कांग्रेस की ओर से लाए गए स्थगन प्रस्ताव के तहत चर्चा के दौरान सुषमा ने कहा, "मैं आज एक बार फिर कह रही हूं कि मैंने कोई गलती नहीं की।" मंत्री ने कहा कि ब्रिटिश सरकार ने इस बात से अवगत कराया था कि उचित कानून के आधार पर ललित मोदी को यात्रा दस्तावेज जारी किया गया। मंत्री ने कांग्रेस के इस आरोप को खारिज किया कि उन्होंने यात्रा दस्तावेज के बदले ललित मोदी से कुछ लिया। सुषमा स्वराज ने लोकसभा मे कांग्रेस पर बोफोर्स मामले में इतालवी व्यापारी क्वात्रोची जा ज़िक्र करते हुए हमला बोला, ''राहुल गांधी को अपनी मां से पूछना चाहिए उन्हें क्वात्रोची से कितना पैसा मिला था।'' कांग्रेस सदस्यों द्वारा लगातार जारी नारों व शोरगुल के बीच सुषमा स्वराज ने कहा, ''ललित मोदी के मामले में मेरा कोई हितों का टकराव नहीं है।
मेरे पति ललित मोदी के पासपोर्ट मामले में वकील नहीं थे और मेरी बेटी नौंवे नंबर की वकील थी। इस मामले में मेरी बेटी और पति ने ललित मोदी से एक नया पैसा नहीं लिया।'' सुषमा स्वराज ने कहा, ''मैं विपक्ष को बताना चाहती हूं हितों का टकराव क्या होता है। हितों का टकराव तब होता है जब चिदम्बरम की पत्नी को उनके ही मंत्रालय की ओर से वकील बनाया जाता है। चिदम्बरम ने सदन में इस बात को स्वीकार किया था।'' सुषमा स्ववराज ने राहुल को जवाब देते हुए कहा कि, ' मैं राहुल जी को कहना चाहती हूं कि बहुत शौक है छुट्टियां मनाने का तो इस बार छुट्टियों में अपने परिवार का इतिहास पढ़ें और वापस आकर पूछें की ममा क्वात्रोची मामले में हमने कितना पैसा खाया, डैडी ने एंडरसन को क्यों छुड़वाया था।' सुषमा ने दोहराया कि उन्होंने ललित मोदी की नहीं, बल्कि उनकी पत्नी की मदद की, जिनका पुर्तगाल में कैंसर का इलाज होना था। सुषमा ने कहा कि जब ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के एक सदस्य ने इसे संसद के संज्ञान में लाया, तो चिदंबरम ने कहा कि विभाग के फैसले की उन्हें कोई जानकारी नहीं है।