जम्मू - श्रीनगर हाईवे पर ऊधमपुर के पास सीमा सुरक्षा बल के काफिले पर आतंकवादियों के हमले में भारत को बड़ी कामयाबी मिली है। इस हमले में एक आतंकी भी पकड़ा गया है। ऐसा लंबे समय बाद हुआ है, जब मुठभेड़ के बाद कोई जिंदा आतंकी सुरक्षा बलों के हाथ आया है। हालांकि आतंकवादियों के हमले में बीएसएफ के दो जवान शहीद और 11 घायल हो गए। जवाबी कार्रवाई में एक आतंकवादी भी मारा गया। कहा जा रहा है कि मुंबई पर हुए आतंकी हमले के दौरान पकड़े गए कसाब के बाद पहली बार किसी आतंकी को पकड़ा गया है। इसका नाम उस्मान उर्फ कासिम खान उर्फ मोहम्मद नावेद बताया जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नावेद पाकिस्तान के फैसलाबाद का रहने वाला है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बुधवार सुबह जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाई-वे से गुजर रहे बीएसएफ के काफिले को आतंकियों ने ऊधमपुर से 10 किलोमीटर दूर नरसू इलाके में निशाना बनाया। पहले से घात लगा कर बैठे दो आतंकियों ने पहले बस के टायर पर गोली मारी। जब तक बीएसएफ के जवान कुछ समझ पाते, उससे पहले आतंकियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। आतंकियों की ओर से ग्रेनेड भी फेंके गए। अधिकारी ने कहा कि हमले में दो जवान शहीद हो गए और कई घायल हो गए। जवाबी फायरिंग में एक आतंकवादी मारा गया, जबकि एक मौके से भाग गया। भागे हुए आतंकी ने आगे जाकर तीन लोगों को बंधक बना लिया।
इन्हीं बंधकों ने उसे बाद में पकड़ लिया। बताया जा रहा है कि बंधक बनाए गए लोग ग्राम रक्षा समिति के थे और उन्होंने ही कासिम को काबू किया। जम्मू-श्रीनगर हाई-वे के इस हिस्से में आतंकवादियों के हमले की घटनाएं कम ही हुई हैं। इसलिए सुरक्षा बलों के लिहाज से इसे परेशानी का सबब माना जा रहा है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस घटना पर ट्वीट किया है कि नेशनल हाइवे के इस हिस्से पर हमले की घटना लंबे समय के बाद हुई है। यह इलाका चरमपंथ से मुक्त माना जाता है। ऐसा होना चिंता की बात है।अमरनाथ यात्रा थी निशाने पर, हिंदुओं को मारने का आता है मजागिरफ्तार आतंकी उस्मान उर्फ कासिम खान उर्फ मोहम्मद नावेद ने बताया कि उनके निशाने पर अमरनाथ यात्रा थी। उसके पिता का नाम मोहम्मद याकूब है और उसके दो भाई व एक बहन भी है। आतंकी पाकिस्तान में गुलाम मुस्तफाबाद गांव का निवासी है। आतंकी का असली नाम उस्मान नहीं मोहम्मद नावेद है और मारे गए आतंकी का नाम नोमान उर्फ नोमी था।
दोनों आतंकी लश्कर-ए-तोएबा के लिए काम करते थे। गहरे नीले रंग की कमीज और भूरे रंग की पतलून पहने नावेद ने कहा कि मैं हिंदुओं को मारने आया था। मेरा साथी गोलीबारी में मारा गया, लेकिन मैं बच गया। अगर मैं मारा जाता तो यह अल्ला का करम होता। यह करने में मजा आता है। शुरू में उसने कहा कि वह 20 साल के आसपास का होगा, लेकिन बाद में दावा किया कि उसकी उम्र केवल 16 साल है। पहले उसने अपनी पहचान कासिम के तौर पर बताई और बाद में अपना नाम उस्मान बताया।