नई दिल्ली 28 फरवरी - केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने गुरुवार को लोकसभा में वर्ष 2013-14 के लिए आम बजट पेश करते हुए उन कदमों की घोषणा की, जिससे लोग सोने में निवेश करने की बजाय वित्त बाजार तथा आवासीय परियोजनाओं में निवेश करने के प्रति प्रोत्साहित हों. चिदम्बरम ने कहा, "सोना खरीदने की बजाय निश्चित तौर पर आवासीय क्षेत्र में पूंजी निवेश को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए."केंद्रीय वित्त मंत्री ने राजीव गांधी इक्विटी सेविंग्स स्कीम (आरजीईएसएस) के उदारीकरण की घोषणा की, ताकि इसे आम लोगों के लिए आकर्षक बनाया जा सके.बजट में निवेशकों को पहली बार सूचीबद्ध शेयरों के साथ-साथ म्यूचुअल फंड में निवेश करने की अनुमति दी गई है.
निवेश केवल एक साल में नहीं, बल्कि लगातार तीन साल में किए जा सकेंगे. आय की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दी गई है.महंगाई से बचने के लिए चिदम्बरम ने मुद्रास्फीति-सूचक कोषों की घोषणा की. उन्होंने कहा, "भारतीय रिजर्व बैंक से सलाह-मशविरे के बाद मैं उन कदमों का प्रस्ताव करता हूं, जिससे महंगाई की स्थिति में भी बचत, खासकर गरीबों एवं मध्यम वर्ग की बचत को सुरक्षित रखा जा सके."ये मुद्रास्फीति सूचक बांड या मुद्रास्फीति-सूचक राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमाण-पत्र हो सकते हैं. उन्होंने कहा, "उपायों की संरचना एवं उसके अभिप्राय की घोषणा आने वाले समय में की जाएगी."चिदम्बरम ने आवासीय क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कर में छूट की घोषणा भी की. उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2013-14 में पहली बार 25 लाख रुपये तक का आवासीय ऋण लेने वाले किसी भी व्यक्ति को ब्याज में एक लाख रुपये तक का कर छूट मिलेगा.उन्होंने कहा, "इससे घर खरीदने को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही इस्पात, सीमेंट, ईंट, लकड़ी, कांच इत्यादि उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिलेगा और निर्माण क्षेत्र में हजारों रोजगार सृजित होंगे."