नई दिल्ली - किसानों के लिए अच्छी खबर या कहें उनकी जीत की खबर है कि मोदी सरकार ने कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों के भारी विरोध को देखते हुए भूमि बिल में संशोधन का विचार त्याग दिया है। अब यूपीए सरकार द्वारा पारित बिल ही वापस संसद में रखा जाएगा। एक तरह से मोदी सरकार को व्यापारियों के लाभ के लिए किए जा रहे छह बड़े संशोधनों से पीछे हटना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार, सरकार भूमि अधिग्रहण के लिए किसानों की सहमति के क्लॉज पर संशोधन वापस लेने वाली है। सरकार औद्योगिक कोरिडोर का प्रस्ताव भी वापस लेने वाली है, स्पेशल केटागरी का क्लॉज भी वापस लेने जा रही है।
कहा जा रहा है कि सामाजिक असर के आकलन का क्लॉज भी वापस लिया जा रहा है। बता दें कि यह पहले से आशंका जताई जा रही थी कि सरकार इस सत्र में विवादास्पद भूमि विधेयक को संभवत: न लाए। सूत्रों के मुताबिक, संयुक्त संसदीय समिति ने भूमि विधेयक की रपट पेश करने के लिए दो अतिरिक्त सप्ताह की मांग इसी उद्ेदश्य के लिए की थी। भारतीय जनता पार्टी के एक नेता ने कहा कि रपट तत्काल नहीं आएगी। कोई भी फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि रपट कब पेश की जाती है। विधेयक पर इस सत्र में बहस हो पाने की उम्मीद नहीं है।