नई दिल्ली 28 फरवरी - रक्षा बजट में कटौती की आशंकाओं को निर्मूल साबित करते हुए वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने अगले साल के लिए 25 हजार करोड़ रुपए से अधिक की बढोत्तरी करते हुए इस मंत्रालय के लिए दो लाख तीन हजार 672 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है. यह पहला मौका है जब देश का रक्षा बजट दो लाख करोड़ रुपए के पार गया है. पिछले साल रक्षा बजट में एक लाख 93 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था, लेकिन बाद में इसमें करीब पंद्रह हजार करोड़ रुपए की कटौती हो गई थी. इसे देखते हुए आशंका व्यक्त की जा रही थी कि इस बार शायद आंकड़ा जस का तस ही रहेगा. इस साल के बजट में आधुनिकीकरण पर होने वाले खर्च के प्रावधान को भी बढाकर 86 हजार करोड़ रुपए कर दिया गया है, जो पिछले साल 78 हजार करोड़ रुपए के लगभग था. बाद में इसमें से दस हजार करोड़ रुपए की कटौती कर दी गई थी. इस साल कई बड़ी रक्षा खरीदारियों को अंतिम रूप दिया जाना है, जिनमें वायु सेना के लिए 50 हजार करोड़ रुपए से अधिक लागत का 126 लड़ाकू विमानों का सौदा और पांचवीं पीढी के विमान के विकास के लिए इससे दुगनी लागत का सौदा शामिल है. इनके अलावा नौसेना के लिए विभिन्न युद्धपोतों, सेना के लिए हेलीकाप्टरों और तोपों की खरीद के सौदे भी रक्षा तिजोरी को खाली कर सकते हैं. अगले साल के बजट में सेना के लिए करीब 81 हजार करोड़, नौसेना के लिए 12 हजार करोड़ और वायु सेना के लिए 18 हजार करोड़ रुपए से अधिक का प्रावधान किया गया है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के खाते में साढे पांच हजार करोड़ रुपए गए हैं, जबकि तीनों सेनाओं के लिए पूंजीगत मद में 86 हजार 740 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. रक्षा मंत्रालय वीवीआईपी हेलीकाप्टरों के 3600 करोड़ रुपए के सौदे में से 1700 करोड़ रुपए की अदायगी कर चुका है और अगर यह सौदा रद्द होता है तो इससे पूंजीगत मद की तिजोरी में यह राशि वापस आ जाएगी. रक्षा बजट में यह बढोत्तरी ऐसे समय की गई है, जब आने वाले आधे दशक में सैन्य बलों द्वारा करीब 80 अरब डालर की खरीदारी की योजना है. सेना और वायु सेना ने वित्त मंत्रालय के सामने दो स्ट्राइक गठन संबंधी करीब साठ हजार करोड़ रुपए की योजना पेश की हुई है, ताकि चीन से लगी सीमा को चाक चौबंद किया जा सके.