नई दिल्ली - नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढिय़ा ने भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधनों का समर्थन करते हुए कहा कि अपने वर्तमान स्वरूप में इसके तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया काफी जटिल है और इसमें कम से कम पांच साल का समय लगेगा। श्री पनगढिय़ा ने यहां नीति आयोग, मानव विकास संस्थान तथा फ्लोरिडा विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक सम्मेलन में यह बात कही। शनिवार से शुरू हुए तीन दिवसीय सम्मेलन का विषय ‘सतत एवं समावेशी शहरी विकास’ है।
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब सरकार भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक पर राज्यों का समर्थन जुटाने में असफल रही है और एक के बाद एक अध्यादेशों के जरिएभूमि अधिग्रहण कानून में संशोधनों को लागू रखने को लेकर उसकी कटु आलोचना हो रही है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष इससे पहले आयोग की वेबसाइट पर ब्लॉग लिखकर भी भूमि अधिग्रहण की जरूरत पर जोर दे चुके हैं। श्री पनगढिय़ा ने सम्मेलन में शहरी विकास के लिए भूमि की दुर्लभता पर टिप्पणी करते हुए वर्तमान कानून को जटिल बताया और कहा कि नए शहर बनाने के लिए जमीन की जरूरत है।
साथ ही मौजूदा शहरों में नए कारोबारों को फलने-फूलने के लिए भी जगह चाहिए। प्रधानमंत्री ने कानून में संशोधन की कोशिश की है। फिलहाल एक अध्यादेश लागू है जो कुछ बाधाओं को दूर करता है। उन्होंने कहा कि एक उपाय जमीनी क्षेत्रफल बढ़ाने के बदले ऊपर की ओर निर्माण क्षेत्र बढ़ाना है, लेकिन उसकी भी कुछ बंदिशें हैं। श्री पनगढिय़ा ने कहा कि शहरीकरण का व्यवस्थित होना भी जरूरी है। तेज और सघन परिवहन व्यवस्था की जरूरत होगी ताकि लोग समय पर कार्यालय पहुंच सकें और मुख्य शहर के बाहर रहने वाले लोगों को रहने के लिए ज्यादा जगह मिल सके।
देश की आर्थिक विकास दर के बारे में उन्होंने कहा कि भारत दहाई प्रतिशत में विकास करने की पूरी क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि मैं हमेशा कहता रहा हूं कि भारत तेजी से विकास करने के लिए तैयार है। वर्तमान विकास दर 7.5 प्रतिशत है। मैं इसके बढक़र आठ से नौ प्रतिशत पर पहुंचने की उम्मीद करता हूं। संभव है कि हम दहाई अंक तक भी पहुंच जाएं।