नई दिल्ली - ललित मोदी प्रकरण और व्यापम घोटाले को लेकर विपक्षी दलों ने संसद के दोनों सदनों में बुधवार को जमकर हंगामा किया, जिसके कारण मानसून सत्र के दूसरे दिन भी कोई कामकाज नहीं हो पाया। लोकसभा में सदस्यों के इस व्यवहार से व्यथित अध्यक्ष सुमित्रा महाजन को हंगामा करने वाले सदस्यों को सख्त कार्रवाई की चेतावनी देनी पड़ी। कांग्रेस के नेतृत्व में लामबंद विपक्ष ने इन दोनों मामलों की जांच तथा विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान तथा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के इस्तीफों की मांग की, वहीं सरकार ने इसे अनुचित बताते हुए कहा कि विपक्ष के पास इन मामलों में कोई तथ्य नहीं है और वह केवल हंगामा कर कामकाज बाधित करना चाहता है।
लोकसभा में मानसून सत्र में कामकाज का बुधवार को पहला दिन था। मंगलवार को सदन की कार्यवाही मौजूदा लोकसभा के सदस्य दिलीप सिंह भूरिया तथा कुछ अन्य सदस्यों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद स्थगित कर दी गई थी। बुधवार को सदन की बैठक शुरू होते ही कांग्रेस तथा कुछ अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने ललित मोदी प्रकरण और व्यापम घोटाले का मुद्दा उठाना शुरू कर दिया। अध्यक्ष ने विपक्षी दलों के सदस्यों के इस संबंध में काम रोको प्रस्तावों के नोटिस खारिज करने तथा प्रश्नकाल शुरू करने की घोषणा की तो उत्तेजित विपक्षी सदस्य अपनी सीट पर खड़े होकर हंगामा करने लगे। कई विपक्षी सदस्य बाजू पर काली पट्टी बांधे हुए थे और कुछ हाथ में तख्तियां लिए हुए थे। हंगामे के बीच अध्यक्ष ने सदस्यों को चेतावनी दी कि सदन में तख्तियां दिखाने एवं काली पट्टी पहनकर आने वाले सदस्यों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
इस चेतावनी के बावजूद विपक्षी सदस्य फिर से सदन के बीचोंबीच आ गए। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दो बार के स्थगन के बाद दिन भर के लिए स्थगित करनी पड़ी। राज्यसभा में भी कांग्रेस की अगवाई में विपक्षी सदस्यों ने इन मुद्दों पर भारी हंगामा किया और लगातार दूसरे दिन कामकाज नहीं होने दिया। सदन के नेता अरुण जेटली ने कहा कि ललित प्रकरण पर विदेश मंत्री बयान देने को तैयार हैं, लेकिन विपक्ष की इस प्रकरण में जांच की मांग अनुचित है। उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी कानूनी प्रावधान का उल्लंघन नहीं हुआ है तो जांच किस बात की कराई जाए। राजस्थान और मध्य प्रदेश के मामलों के बारे में उन्होंने कहा कि इनसे केंद्र सरकार का कुछ लेना-देना नहीं है और यदि राज्यों के मामलों पर चर्चा की परंपरा शुरू होती है तो फिर यह चर्चा केरल से लेकर हिमाचल प्रदेश और असम तक होगी।
विपक्ष का कहना था कि व्यापम घोटाले से जुड़ी घटनाओं में मध्य प्रदेश से बाहर के लोगों की भी मौत हुई है, इसलिए यह राज्य का ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय मुद्दा है और केंद्र सरकार को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए। महिला एवं बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी ने किशोर न्याय विधेयक-2015 पेश करने की कोशिश की, लेकिन विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण यह विधेयक पेश नहीं किया जा सका। सदन की कार्यवाही चार बार के स्थगन के बाद दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।