नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्योगपतियों का सोमवार को आह्वान किया कि वे एप्रेंटिसशिप के लिए दरवाजे खोलें और कम से कम बीस लाख लोगों को इस प्रणाली से रोजगार दें। श्री मोदी ने भारतीय श्रम सम्मेलन के 46वें सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि आज चीन में एप्रेंटिसों की संख्या दो करोड़, जापान में एक करोड़ और जर्मनी में तीस लाख है, लेकिन दुख की बात है कि सवा सौ करोड़ के देश में यह संख्या केवल तीन लाख है।
प्रधानमंत्री ने सीधे उद्योगपतियों को इसके लिए जिम्मेदार बताते हुए कहा कि ये उद्योगपति एप्रेंटिसशिप के लिए ताला लगा कर बैठें हैं। उन्हें लगता है कि एप्रेंटिस को रोज़गार देना पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी भरे स्वर में कहा कि ऐसी स्थिति चलने वाली नहीं है। मैं उद्योगपतियों से आग्रह करता हूं कि वे एप्रेंटिसशिप के लिए दरवाजा खोलें। मुनाफा कम होता है तो हो, लेकिन उन्हें सोचना होगा कि समाज के लिए उनकी जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री ने श्रम कानूनों में सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि एक ही कानून में सरकार, उद्योगपतियों और श्रमिकों तीनों के लिए उनके तर्कों के अनुरूप रास्ते मौजूद हैं। कानून ऐसे होने चाहिए, जिनकी एक दिशा स्पष्ट हो और वे समग्रता के आधार पर बनाए जाएं।
उन्होंने कहा कि श्रम कानूनों में सुधार सबकी सहमति से और सबकी चिंताओं के अनुरूप किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उद्योग और उद्योगपति के हितों में बहुत बारीक अंतर है। इसी प्रकार से देश और सरकार तथा श्रमिकों एवं श्रमिक संगठनों के हितों में भी बारीक अंतर होता है। हमें श्रमिकों, उद्योगों और देश के हितों को तरजीह देनी होगी। उद्योग एवं श्रमिक के बीच रिश्तों पर अपने विचार साझा करते हुए मोदी ने कहा कि श्रमिक एवं मालिक के बीच परिवार भाव पैदा करने की जरूरत है, तभी सबका कल्याण होगा। जब तक श्रमिक दुखी रहेगा तब तक देश कैसे सुखी हो सकता है। उन्होंने कहा कि देश के निर्माण में श्रमिकों का अहम योगदान है और समाज में हर प्रकार के श्रम को उचित सम्मान दिया जाना चाहिए।