अमृतसर - ईद के दिन भी पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आया। शनिवार को पहले पाकिस्तान ने भारत की ओर से भेंट की गई मिठाई ठुकरा दी। इसके कुछ घंटे बाद जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिला और पुंछ में संघर्ष विराम का उल्लंघन किया, जिसमें पांच लोग घायल हो गए। यही नहीं, शनिवार को यह भी बात सामने आई कि पाकिस्तान ने मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड जकीउर रहमान लखवी के वॉयस सैंपल सबूत के तौर पर इस्तेमाल करने से भी इनकार कर दिया है।
नौशहरा सेक्टर पर शनिवार को पाकिस्तान ने दो बार सीजफायर तोड़ दिया। पाकिस्तानी रेंजर्स ने फायरिंग की और मोर्टार भी दागे। इसमें दो महिलाओं सहित पांच लोग घायल हो गए। इस हरकत के बाद भारत ने भी जवाबी फायरिंग की। इससे पहले ईद के पावन अवसर पर बीएसएफ की तरफ से अटारी भारत-पाक सीमा पर पाक रेंजर्स को भेंट की गई मिठाई लेने से इनकार कर दिया। इस दौरान डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल एमएफ फारुखी ने बताया कि हर साल हमारी तरफ से ईद की मिठाई पाक रेंजर्स को भेंट की जाती है, पर इस बार उन्होंने मिठाई लेने से इनकार कर दिया।
उन्होंने बताया कि उनका प्रयास होता है कि भारत-पाक सीमा पर शांति कायम रहे, लेकिन मिठाई न लेकर पाक ने हमारी भावनाओं को आहत किया हैं। उधर, पाकिस्तान ने मुंबई हमलों के आरोपी आतंकवादी जकी उर रहमान लखवी के खिलाफ भारत की ओर से दिए आवाज के नमूनों को सबूत मानने से इनकार कर दिया। इससे साफ होता है कि मुंबई हमले की जांच को लेकर कार्रवाई से बचने के लिए पाकिस्तान का टालमटोल वाला रवैया जारी है। मामले को चार साल तक देखने के बाद पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) का अब कहना है कि आवाज के नमूनों को सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
मामले से जुड़े अभियोजक मोहम्मद अजहर चौधरी ने बताया कि हालांकि यह जांच में सहायक हो सकती है, लेकिन भारतीय खुफिया एजेंसी द्वारा रिकार्ड किए गए आडियो को सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। ऐसा कोई कानून नहीं है, जिसके तहत आवाज की प्रमाणिकता साबित की जा सके। एफआईए का कहना है कि वैसे मौजूदा कानून इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के इस्तेमाल की अनुमति देते हैं, लेकिन ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत आरोपी को अपनी आवाज की आडियो रिकार्डिंग उपलब्ध कराने के लिए विवश किया जा सके और उपलब्ध नमूने से उसका मिलान किया जा सके।
मोहम्मद अजहर चौधरी ने कहा कि अमरीका और भारत में भी इस तरह का कानून नहीं है। हम आरोपी को आवाज का नमूना देने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। इन तीन घटनाओं से पाकिस्तान ने साबित कर दिया कि वह ईद जैसे मौके पर भी शांत नहीं रह सकता।