बंगलूर - पीएम की कुर्सी से उतरने के 17 साल बाद भी एचडी देवगौड़ा को वीआईपी सुरक्षा मिली हुई है। उन्हें और उनके दो पुत्रों की सुरक्षा-सेवा में 61 पुलिसकर्मी तैनात हैं। देवगौड़ा के दोनों पुत्र कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। देवगौड़ा ने जब पीएम की कुर्सी छोड़ी थी तो उन्होंने अपने उत्तराधिकारी अटल बिहारी बाजपेयी से अपनी एसपीजी सिक्योरिटी को हटाने के लिए कहा था।
इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा था कि वह कर्नाटक के लोगों से मिलने में सिक्योरिटी की बाधा नहीं चाहते हैं, लेकिन इसके बावजूद तब सत्ता में रही जनता दल की सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्रियों की सुरक्षा-व्यवस्था की शुरुआत की और 200 से अधिक पुलिसकर्मियों को पूर्व पीएम की सुरक्षा में तैनात कर दिया। एचडी देवगौड़ा पीएम के पद पर केवल 11 महीने ही रहे थे। 2009 में जाकर सुरक्षा व्यवस्था में तैनात संख्या में कुछ कमी की गई। तब पुलिस कमिश्नर के पद पर आए शंकर बिदारी ने उनकी सुरक्षा में लगी भारी सुरक्षा इकाई को घटाकर आधा करने का फैसला किया।
1998 में हुए लोकसभा चुनावों में देवगौड़ा को असफलता हाथ लगी थी। वर्तमान में उनकी सुरक्षा में 27 पुलिसकर्मी और उनके दोनों पुत्रों की सुरक्षा में 15 और 17 जवानों की सशस्त्र टुकड़ी तैनात है। जनवरी 2015 में वीआईपी संस्कृति के खिलाफ कांग्रेस के नेताओं ने शिकायत दर्ज कराई थी। कुछ विशेष मामलों में पूर्व प्रधानमंत्रियों के अनुरोध करने पर प्रधानमंत्रियों और उनके परिवार को कार्यकाल के दस साल बाद तक सुरक्षा दिए जाने का प्रावधान है।
डीकेसी के चेयरमैन ने दर्ज शिकायत में कहा है कि राज्य सरकार में पुलिसकर्मियों की कमी पड़ रही है इसके बावजूद राज्य सरकार ने 30 करोड़ रुपए से अधिक राशि देवगौड़ा की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों के वेतन और अन्य सुविधाओं पर खर्च किए हैं। उन्होंने एक अधिकारिक शिकायत दर्ज करने के लिए विस्तृत जानकारी भी मांगी थी।