नई दिल्ली - व्यापमं घोटाले को लेकर मामला दिन-ब-दिन उलझता जा रहा है। इसी घोटाले के हिस्से में तीन साल पहले 19 साल की छात्रा नम्रता दामोर जिसका शव सदिग्ध हालात में रेल की पटरियों पर मिला था। उसकी फाइल खुलने के बाद इस मामले ने अब एक नया मोड ले लिया है। इंदौर की मेडिकल छात्रा नम्रता का शव 7 जनवरी 2012 को मध्यप्रदेश के उज्जैन में रेलवे ट्रैक पर मिला था। पुलिस ने पहले मामले को हत्या बताया, और फिर बाद में इसे हादसा बता कर मामले को खत्म कर दिया गया।
जिस दौरान पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ कहा गया था कि नम्रता को गला घोंट कर मारा गया है। नम्रता दामोर की ऑटोप्सी करने वाले तीन डॉक्टरों में से एक बीबी पुरोहित ने कहा कि उसकी हत्या की गई थी। नम्रता की मौत का मामला दोबारा चर्चा में पिछले दिनों आया जब उसके पिता का साक्षात्कार करने के कुछ ही मिनट बाद एक टीवी पत्रकार की मौत हो गई। वर्ष 2012 को नम्रता का शव मध्यप्रदेश के उज्जैन में रेलवे ट्रैक पर पाया गया था। वह इंदौर-बिलासपुर रेलगाड़ी से जबलपुर जा रही थी। शव मिलने के 22 दिन बाद नम्रता के भाई दीपेंद्र ने उसकी शिनाख्त की थी।
वर्ष 2014 में जब पुलिस ने मामले की क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की, तो उन्होंने इसे खुदकुशी बताया, जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट से बिल्कुल उलट था, क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, नम्रता की मौत मुंह-नाक दबोचे जाने की वजह से हिंसक तरीके से दम घुटने के कारण हुई थी, और ये निष्कर्ष स्पष्ट संकेत देते हैं कि नम्रता की हत्या की गई थी। मेडिकल की दूसरे वर्ष की छात्रा नम्रता कथित रूप से उन आवेदकों में शामिल थी, जिन्होंने गलत तरीकों से मेडिकल प्रवेश परीक्षा पास की थी। इस परीक्षा को पास करने के लिए लाखों आवेदकों ने राजनेताओं और नौकरशाहों को कथित रूप से रिश्वत दी थी।