नयी दिल्ली - देशभर में तेजी से पहुंचा दक्षिण-पश्चिम मानसून अब बहक गया है। खासकर पश्चिमोत्तर क्षेत्रों में यह कमजोर पड़ रहा है। मौसम विभाग ने अगले 2 महीने में सामान्य से कम बारिश का अनुमान व्यक्त किया है और कृषि मंत्रालय को आकस्मिक योजना के साथ तैयार रहने की सलाह दी है। भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक लक्ष्मण सिंह राठौर के मुताबिक जुलाई और अगस्त में क्रमश: 8 और 10 फीसदी कम बारिश हो सकती है। अच्छी बारिश फिलहाल पूर्व, पूर्वोत्तर और तराई के कुछ क्षेत्रों तक सीमित रह सकती है। बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के आसपास के क्षेत्रों में कम दबाव का क्षेत्र बन रहा है।
इससे इन क्षेत्रों में मध्यम से तेज बारिश का अनुमान है। लेकिन अन्य क्षेत्रों, खासकर पूर्वोत्तर के मैदानी इलाकों और मध्य भारत में अगले 15-20 दिनों में मानसून की सक्रियता की उम्मीद नहीं है। हालांकि पहले के अनुमान के मुकाबले देशभर में स्थिति अच्छी है। राठौर ने कहा, यह राहत की बात है कि मानसून पूर्व की बारिश से कुछ जलाशय भर गए हैं. जून में काफी अच्छी बारिश हुई, जो कि बुआई का महीना था। लेेकिन हमें संतुष्ट नही होना चाहिए और एक आकस्मिक योजना बनानी चाहिए, क्योंकि जुलाई और अगस्त में जून के बराबर बारिश होने की संभावना नहीं है। राठौर ने किसानों से सलाह दी कि मौसम की भविष्यवाणी को ध्यान में रखकर फसल चुनें।
उन्होंने उदाहरण दिया कि जिस क्षेत्र में आमतौर पर 100 से 110 मिलिमीटर बारिश होती है, वहां सिर्फ 60 से 70 मिलिमीटर बारिश हुई है, तो वहां के किसानों को धान की जगह मक्की उगाना चाहिए। मौसम विभाग ने इस साल सामान्य की तुलना में 88 फीसदी बारिश होने की संभावना व्यक्त की है। उसके अनुसार देश के अधिकांश भागों, खासकर उत्तर-पश्चिम भारत को कम बारिश का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि जून में सामान्य से 28 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गयी।