नई दिल्ली - संसद भवन की कैंटीन में खाने-पीने पर 2013-14 में एक साल में 14 करोड़ रूपये से ज्यादा की सब्सिडी दी गई है। जबकि एक सांसद को वेतन-भत्ते समेत लाखों रूपए मिलते हैं। बावजूद इसके सरकार जनता के पैसे को "माननीयों" को सब्सिडी वाला खाना खिलाती है। आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष अग्रवाल की मांगी जानकारी पर इसका खुलासा हुआ। उन्होंने इसे वापस लेने की मांग की है। आरटीआई में ये भी खुलासा हुआ है कि संसद की कैंटीन में सांसदों को बाजार कीमत से 10 गुना सस्ती चीजें उपलब्ध कराई जाती है।
आरटीआई कार्यकर्ता ने सवाल उठाया है कि कैंटीनों में सांसद, उनके परिजन, संसद भवन में कार्य करने वाले लोग सस्ता भोजन ग्रहण करते हैं। ये अच्छी तनख्वाह पाने वालो में है इन्हे इस तरह की छूट दिया जाना गलत है। सस्ते भोजन को लेकर पहले से यह मांग उठ रही है कि लाखों रूपए पाने वाले माननीयों को सब्सिडी क्यों दी जा रही है। इस पर रोक लगाई जाए। भोजन नो प्रॉफिट-नो लॉस के आधार पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए। दिसंबर 2002, अप्रैल 2003 और दिसंबर 2010 में संसद कैंटीन मूल्य में बढ़ोत्तरी की गई। इसके बाद से महंगाई कई गुणा बढ़ गई लेकिन कैंटीन मूल्य में कोई बदलाव नहीं किया गया।
सब्जियां - 41 - 04 उबली सब्जियां - 31.73 - 05 दाल फ्राई - 13.11 - 04 मसाला डोसा - 23.26 - 06 बड़ा - 10.48 - 02 फ्राइड फिश - 68.74 - 25 चिकन करी - 45 - 29 मटन करी - 61 - 20 उबला अंडा - 7.37 - 04 नानवेज थाली 99.04 33 ये कीमतें बाजार में सिर्फ कच्चे सामान की बताई गई हैं। इसमें अन्य खर्चो को नहीं जोड़ा है।