नई दिल्ली - उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को भी सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय को जमानत पर रिहा नहीं किया, लेकिन उनकी कंपनी द्वारा पेश बैंक गारंटी के फार्मेट को मंजूरी दे दी। अदालत ने साफ किया कि दस हजार करोड़ रुपए जमा कराने के बाद ही उन्हें रिहा किया जा सकता है। न्यायालय ने पैरोल के लिए सुब्रत रॉय की याचिका भी खारिज कर दी, लेकिन सहारा प्रमुख को जेल में मिली कान्फ्रेंस रूम की सुविधा को छह हफ्ते के लिए बढ़ा दिया है, ताकि वह अपनी संपत्तियों की बिक्री के लिए संभावित खरीदारों से बातचीत कर सकें।
गत 15 महीने से जेल में बंद सुब्रत रॉय को जमानत पर रिहा होने के लिए कुल दस हजार करोड़ रुपए जमा कराने हैं, जिनमें से पांच हजार करोड़ रुपए नकद और पांच हजार करोड़ रुपए बैंक गारंटी के रूप में देने हैं। सुब्रत रॉय के वकील कपिल सिब्बल ने न्यायालय को शुक्रवार को बताया कि बैंक फिलहाल गारंटी देने से पीछे हट गए हैं। न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर की अगवाई वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने कपिल सिब्बल की दलील सुनने के बाद कहा कि जब सहारा ने यह आश्वासन दिया था कि उनके पास बैंक गारंटी तैयार है, तब ही जमानत के लिए बैंक गारंटी जमा कराने की शर्त रखी गई।
खंडपीठ ने कहा कि बैंक गारंटी जमा कराने के आश्वासन के कारण फैसला पहले ही तैयार कर लिया गया था और अब इसमें सहारा द्वारा बैंक गारंटी जमा कराने तक कुछ नहीं किया जाएगा। खंडपीठ ने साथ ही यह भी फैसला दिया कि सुब्रत रॉय चाहे जब रिहा हों, लेकिन उन्हें अपनी रिहाई के 18 माह के अंदर निवेशकों को 36 हजार करोड़ रुपए लौटाने होंगे। वे यह रकम तीन-तीन हजार करोड़ रुपए की नौ किस्तों में लौटा सकते हैं। सहारा प्रमुख को हर दो महीने के बाद तीन हजार करोड़ रुपए देने होंगे और अगर उन्होंने दो महीने ऐसा नहीं किया तो वह वापस जेल में होंगे।