नई दिल्ली - अगले सात वर्षों में भारत छह लाख करोड़ रुपए के निवेश से एक लाख मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन कर ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में दुनिया में बड़ी ताकत बनेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति की यहां हुई बुधवार को बैठक में देश के सौर ऊर्जा उत्पादन को पांच गुना बढ़ाकर एक लाख मेगावाट करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। केंद्रीय संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद कहा कि भारत 2021-22 तक जवाहर लाल नेहरू सोलर मिशन के तहत सौर ऊर्जा का उत्पादन पांच गुना कर एक लाख मेगावाट ऊर्जा का उत्पादन करने लगेगा।
इस तरह वह ग्रीन ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया की बड़ी ताकत बन जाएगा। हमारी सरकार का यह ऐतिहासिक फैसला है। उन्होंने कहा कि इसके लिए छह लाख करोड़ रुपए का पूंजीनिवेश किया जाएगा। पहले चरण में 15 हजार 50 करोड़ रुपए खर्च करेगी। इस योजना के लिए राज्यों से भी पैसा लिया जाएगा और पीपीपी मॉडल पर इसे लागू किया जाएगा। श्री प्रसाद ने यह भी बताया कि ग्रिड पावर बढ़ाकर दो हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा और सोलर पावर स्टेशनों का निर्माण किया जाएगा।
इससे 12 हजार लोगों को नौकरियां मिलेंगी। उन्होंने बताया कि 40 गेगावाट सौर ऊर्जा रूफटॉप के जरिए तथा 60 गेगावाट व्यापक एवं मध्यम स्तर के ग्रिड से जुड़ी सौर ऊर्जा परियोजनाओं से किया जाएगा। जवाहर लाल नेहरू सोलर मिशन 2009 में शुरू किया गया था। इसके तहत 2022 तक 20 हजार मेगावाट विद्युत उत्पादन का ही लक्ष्य रखा गया था। 2010 से 2015 के बीच 18 मेगावाट से बढ़ाकर 3800 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन होने लगा। इससे प्रति यूनिट खर्च 17.90 रुपए से घटकर सात रुपए प्रति यूनिट हो गया।