नई दिल्ली - हिंसा चाहे किसी भी इलाके में भडक़े, नुकसान पूरे देश को उठाना पड़ता है। दंगों में भले ही मुट्ठी भर लोग शामिल हों, लेकिन जेब देश के हरेक व्यक्ति की कटती है। इस बात की तसदीक करती एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले साल देश में हुई हिंसात्मक घटनाओं ने हरेक व्यक्ति का करीब 18000 रुपए का नुकसान किया। यह आकलन इंस्टीच्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस की ताजा रिपोर्ट में लगाया गया है।
संगठन के मुताबिक, साल 2014 के दौरान हिंसात्मक घटनाओं के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था को 341.7 अरब डालर यानी 21932 अरब रुपए का नुकसान हुआ। संगठन के इस वर्ष के वैश्विक शांति सूचकांक (जीपीआई) में 162 देशों की सूची में भारत 143वें स्थान पर है। जीपीआई-2015 की बुधवार को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, आंतरिक संघर्षों और उसके परिणाम स्वरूप शरणार्थी संकट से वैश्विक स्तर पर हिंसा होने वाला नुकसान बढ़ गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल भारत में हिंसा को काबू करने और उससे उपजे हालात से निपटने में 341.7 अरब डालर यानी 21932 अरब रुपए तक रहा। यह देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.7 प्रतिशत यानी प्रति व्यक्ति 273 डालर यानी 17522.49 रुपए बनता है। वहीं, दुनियाभर में हिंसा से हुए नुकसान की बात करें तो रिपोर्ट के अनुसार ग्लोबल इकॉनोमी पर 2014 में कुल मिलाकर 14300 अरब डालर यानी 917774 अरब रुपए का नुकसान हुआ। यह राशि ग्लोबल जीडीपी का 13.4 प्रतिशत है।
इस बार क्षेत्र वार तुलना में दक्षिण एशिया एक पायदान ऊपर चढ़ गया। इसके पीछे पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका क्षेत्र में स्थिति का तेजी से बिगडऩा बताया गया है। दक्षिण एशिया में कुल मिलाकर भूटान, नेपाल और बांग्लादेश की स्थिति में सुधार रहा, जबकि भारत दक्षिण एशिया के सात देशों में पांचवें स्थान पर रहा।