फैजाबाद - फर्जी डिग्री विवाद में फंसे दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जितेद्र सिंह तोमर को गुरुवार को उस समय एक और बड़ा झटका लगा ,जब कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया और मामले की सुनवाई 16 जून तक के लिए टाल दी। अदालत ने कहा कि जांच के दौरान तोमर को जमानत नहीं दी जा सकती। तोमर ने बुधवार को कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर गुरुवार को सुनवाई हुई। दूसरी तरफ, तोमर को दिल्ली पुलिस पटना लेकर गई है। तोमर को सीधे फ्लाइट के जरिए पटना ले जाया गया और वहां से भागलपुर, जहां से उन्होंने कानून की डिग्री हासिल की है।
इससे पहले पुलिस तोमर को यूपी के फैजाबाद स्थित राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय लेकर गई, जहां से उन्होंने बीएससी की डिग्री लेने का दावा किया था, लेकिन जब पुलिस ने तोमर से उनके कॉलेज का रास्ता पूछा तो तोमर बगलें झांकने लगे। तोमर न तो पुलिस को विश्वविद्यालय का फिजिक्स लैब दिखा सके और न ही उन शिक्षकों को पहचान सके, जिन्होंने 1987-1988 में यहां बीएससी के छात्रों को पढ़ाया था।
झांसी के बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने पहले ही साफ कर दिया है कि तोमर का माइग्रेशन सर्टिफिकेट फर्जी है। तोमर का दावा है कि उन्होंने 1988 में यहां से बीएससी की, जिसकी डिग्री 2011 में निकाली, लेकिन जब पुलिस ने तोमर का विश्वविद्यालय के अधिकारियों से सामना कराया गया, तो तोमर कोई ठोस दलील नहीं दे सके।