नई दिल्ली - भारतीय सेना द्वारा म्यांमार में मंगलवार को चलाए गए आपरेशन में करीब 150 उग्रवादी मारे गए हैं। गृह मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि 13 घंटे तक तक चला यह आपरेशन इतना सटीक था कि उग्रवादियों को बंदूक संभालने का मौका तक नहीं मिला। आपरेशन को सफलता से अंजाम देने के बाद भारतीय जवान बिना किसी नुकसान के स्वदेश लौट आए।
म्यांमार की सीमा के अंदर भारतीय सेना द्वारा उग्रवादियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की तैयारी पांच दिन पहले शुरू हो चुकी थी। इस आपरेशन के लिए जहां राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने बांग्लादेश का जाने का प्रोग्राम बदल दिया था, वहीं आर्मी चीफ दलबीर सिंह सुहाग ने भी यूके का दौरा कैंसल कर दिया था। यह आपरेशन अहम और सटीक खुफिया सूचनाओं के आधार पर ही सफल हो पाया। पूरी प्लानिंग के बाद इंडियन आर्मी के पैरा कमांडोज ने उग्रवादियों के दो कैंपों पर हमला किया और उन्हें अच्छा-खासा नुकसान पहुंचाया।
अंदाजा है कि इन कैंपों में करीब 150 उग्रवादी थे। इन दोनों कैंपों को तबाह कर दिया गया है। सूचना एवं प्रसारण केंद्रीय राज्यमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि यह कार्रवाई पाकिस्तान समेत सभी देशों और संगठनों के लिए एक संदेश है जो भारत के खिलाफ आतंक को बढ़ावा देते हैं। एक आतंकवादी केवल आतंकवादी होता है, उसकी कोई दूसरी पहचान नहीं होती। हम जब चाहेंगे, तब कार्रवाई करेंगे। राठौड़ ने बताया कि इस कार्रवाई का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिया था।