ढाका - बांग्लादेश के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर होन से भारतीय कार्गो जहाज अब चटगांव और मोंगला बंदरगाह का इस्तेमाल कर सकेंगे। कूटनीतिक रूप से यह समझौता भारत के लिए काफी अहम है। चटगांव बंदरगाह को चीन ने विकसित किया था और यह उसकी मशहूर रणनीति मोतियों की माला का हिस्सा है। इस रणनीति के तहत चीन विभिन्न देशों के द्वीपों पर मौजूदगी बनाकर हिंद महासागर पर पकड़ बनाना चाहता है।
ऐसा माना जाता है कि चीन अपने कूटनीतिक उद्देश्यों के लिए इस पोर्ट का इस्तेमाल करता रहा है। भारत के लिए इस बंदरगाह पर पहुंच होना आर्थिक तौर पर भी बड़ी कामयाबी है और पड़ोसी देश बांग्लादेश का भरोसा भी इससे प्रकट होता है। सरकार ने अपने पड़ोसी को दो अरब डालर की लाइन ऑफ क्रेडिट देने की घोषणा की है, जिसके बदले में भारत में 50000 नौकरियों के अवसर पैदा होंगे और सरकार की मेक इन इंडिया मुहिम को इससे बढ़ावा मिलेगा। मोदी, हसीना और ममता ने दो बस सेवाओं को भी हरी झंडी दिखाई, जो उत्तर-पूर्वी राज्यों को ढाका के जरिए कोलकाता से जोड़ेगी। बांग्लादेश भी नेपाल और भूटान के बाजार तक पहुंच बनाने के लिए भारतीय जमीन का इस्तेमाल कर सकेगा।
तीस्ता सौदे को जिंदा रखते हुए, मोदी ने भारत की राज्य सरकारों की मदद से तीस्ता और फेनी नदी जल बंटवारे के मुद्दे पर बांग्लादेश के साथ उचित समाधान निकलने का भी विश्वास जताया। पीएम ने कहा कि हमारी नदियों से मतभेद नहीं पैदा होने चाहिए, बल्कि इनसे रिश्ते पोषित होने चाहिए। जल का बंटवारा, हर चीज से ऊपर एक मानवीय मुद्दा है। यह सीमा के दोनों ही तरफ के जीवन और रोजगार को प्रभावित करता है। पीएम ने आगे कहा कि हमने भूमि सीमा समझौते का राजनीतिक समाधान कर आपसी भाईचारे का परिचय दिया है। मुझे विश्वास है कि भारत की राज्य सरकारों की मदद से, हम तीस्ता और फेनी नदियों पर सही हल तक पहुंच जाएंगे। हमें साथ मिलकर नदियों को पुनर्जीवित और उनकी सफाई का काम भी करना होगा।