नई दिल्ली - देश में इस साल महज 88 फीसदी औसत बारिश के अनुमान अगर सही साबित होता है, तो आम आदमी की जेब पर यह बड़ा भारी पडऩे वाला है। खराब मॉनसून जनवरी में ‘महंगाई बम’ के रूप मे फूटेगा । इस भविष्यवाणी ने मंगलवार को रिजर्व बैंक के माथे पर भी बल डाल दिए और उसे आर्थिक वृद्धि का अनुमान अप्रैल के 7.8 प्रतिशत से घटाकर 7.6 प्रतिशत करने पर मजबूर कर दिया। रिजर्व बैंक ने सरकार को खराब मॉनसून से निपटने के लिए कमर कसने की सलाह दे डाली है। रिजर्व बैंक का मानना है कि मुद्रास्फीति अगस्त तक नीचे बनी रहेगी पर उसके बाद जनवरी 2016 तक यह बढक़र 6 प्रतिशत तक हो जाएगी।
रिजर्व बैंक ने सरकार से इस स्थिति से निपटने के लिए ‘आकस्मिक आपात योजना’ तैयार रखने को कहा है, ताकि कमजोर मॉनसून की वजह से कम खाद्यान्न उत्पादन के प्रभाव से बेहतर ढंग से निपटा जा सके। रिजर्व बैंक के लिए दूसरी चिंता कच्चे तेल के बढ़ते दाम की है। अप्रैल की मौद्रिक समीक्षा के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 9 प्रतिशत बढ़ गए हैं। मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा के तुरंत बाद बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स 600 से अधिक अंक गिर गया।
हालांकि, बाद में बाजार में कुछ सुधार देखा गया। उन्होंने मॉनसून के असफल रहने की स्थिति में संभावित मुद्रास्फीतिक प्रभाव से निपटने के लिए मजबूत खाद्य प्रबंधन पर जोर दिया। राजन ने नीतिगत दर में कटौती के फैसले को स्पष्ट करते हुए कहा, ‘प्रस्तावित मुद्रास्फीति में नरमी के रास्ते (2018 में 4 प्रतिशत) पर बने रहने के लिए मध्यम अवधि के दौरान कमजोर निवेश और आपूर्ति अड़चनों को दूर करने के लिए यह बेहतर होगा कि शुरुआत में ही आज दर में कटौती की जाए और उसके बाद आंकड़े आने और अनिश्चितता के छटने की प्रतीक्षा की जाए।