नई दिल्ली - केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकतंत्र में प्रधानमंत्री को ही अंतिम फैसला करने का अधिकारी बताया लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास सारी शक्तियां केन्द्रित होने की आलोचनाओं को खारिज कर दिया। जेटली ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सभी की बातों को सुन कर सूझबूझ और अनुभव से अंतिम फैसला करते हैं।
उन्होंने कहा कि संप्रग शासन के दौर में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 'शक्तिविहीन'थे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रधानमंत्री ही अंतिम फैसला करता है और नरेन्द्र मोदी एक मजबूत नेता है लेकिन वह स्वयं सारी बातों को समझकर एवं अनुभव लेकर काम करने वाले प्रधानमंत्री भी हैं जो सबकी बात सुनते हैं।
वित्त मंत्री ने आज एक निजी टीवी कार्यक्रम के दैारान कहा कि लोकतंत्र में उम्मीद की जाती है उनके शब्द अंतिम होते हैं और इसमें कुछ गलत भी नहीं है। वाजपेयी सरकार में भी सबसे विचार विमर्श किया जाता था लेकिन प्रधानमंत्री का फैसला आखिरी होता था। जेटली ने कहा कि उनकी तुलना मनमोहन सिंह से नहीं की जा सकती क्योंकि उनके बारे में कहा जाता था कि वे ऐसे प्रधानमंत्री के रूप में चित्रित किये गये जिसके पास पद तो था लेकिन जिसके पास शक्तियां नहीं थी।
उनकी योग्यता के अनुसार यदि कांग्रेस ने कभी उन्हें खुलकर काम करने दिया होता तो भारत का इतिहास आज निश्चित रूप से भिन्न होता।