जालंधर - बेमौसम की बारिश के कारण फलों के राजा आम की देसी नस्ल को 100 फीसदी नुकसान होने के कारण इस बार लोग देसी आम से वंचित रहेंगे। इस साल फरवरी, मार्च तथा अप्रैल के मध्य तक हुई बारिश के कारण अनाज, सब्जियों तथा अन्य फसलों के साथ साथ पंजाब तथा हिमाचल प्रदेश में होने वाले देसी किस्म के आम को 100 फीसदी नुकसान हुआ है।
आम की फसल एक साल ज्यादा तथा एक साल कम होती है। आम के पेड़ों पर 3 साल में एक बार आम लगते हैं। पिछले वर्ष ज्यादा फसल का मौसम था लेकिन बारिश के कारण आम को तेला (डस्ट) नामक रोग लगने के कारण आम को काफी नुकसान हुआ था। आम तौर पर फरवरी के माह में आम के पेड़ों पर बौर आता है तथा मार्च के अंत तक मौसम गर्म होने के साथ साथ यह फूल छोटे छोटे फल का रूप ले लेते हैं।
इस वर्ष कम फसल का मौसम है और बारिश तथा ओलावृष्टि के कारण यह फूल भी गिर गए जिसके कारण आम पूरी तरह से नष्ट हो गया। देसी आम के बाजार में न आने के कारण अन्य किस्म के आमों के दामों में भी बढ़ोतरी होगी। सफेदा किस्म का आम बाजार में 70 से 80 रुपए किलो बिक रहा है।
पंजाब बागवानी विभाग के उपनिदेशक डॉ सतवीर सिंह ने बताया कि पंजाब में लगभग 6743 हेक्टेयर रकबे में आम के बाग है। पंजाब के गुरदासपुर, होशियारपुर, बस्सीपठाना, अमृतसर तथा जालंधर के कुछ क्षेत्र में देसी आम की बहुतायत होती है। हिमाचल प्रदेश में निजी क्षेत्र के साथ-साथ सरकारी जमीनों पर भी आम के पेड़ बहुतायात में पाये जाते हैं लेकिन बारिशों से हुए नुकसान से इस बार लोगों को अन्य राज्यों से आने वाले अन्य किस्म के आमों का ही स्वाद लेना पड़ेगा।