मुंबई - सरकार तथा विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा इस साल देश की विकास दर 7.5 प्रतिशत या इससे ज्यादा रहने के अनुमान के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर रघुराम राजन का मानना है कि वृहद अर्थव्यवस्था के मानदंडों में सुधार के बावजूद अभी देश की अर्थव्यवस्था के विकास पकडऩे की रफ्तार धीमी है। श्री राजन ने यहां राज्यों के सचिवों /वित्त सचिवों तथा राज्यों के चुनिंदा सहकारी सचिवों की बैठक का उद्घाटन करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के समग्र वित्तीय प्रदर्शन को बेहतर बनाने में राज्य सरकार की महत्त्वपूर्ण भूमिका होगी।
उन्होंने कहा कि सहकारी बैंकिंग क्षेत्र पिछड़े समूहों को वित्त उपलब्ध कराने में विशेष भूमिका निभाते हैं और इसलिए इनके प्रशासनिक ढांचे, पूंजीकरण और शिकायत निपटान प्रक्रिया में बेहतरी की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सक्षम प्रशासन के बिना सिर्फ इस क्षेत्र में पूंजी उपलब्ध कराना अपर्याप्त होगा। आरबीआई ने बताया कि सोमवार को हुई बैठक में श्री राजन ने इस क्षेत्र के बेहतर प्रशासनिक ढांचे के लिए राज्य स्तरीय संयोजन समितियों (एसएलसीसी) को ज्यादा प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
उन्होंने विभिन्न नियामक एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान बढ़ाने तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई को महत्त्वपूर्ण बताया। उल्लेखनीय है कि अवैध रूप से पूंजी जुटाने जैसी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए हाल ही में हर राज्य के एसएलसीसी का पुनर्गठन किया गया है। बैठक को पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष यूके सिन्हा तथा नाबार्ड के अध्यक्ष हर्ष कुमार भनवाला ने भी संबोधित किया। श्री सिन्हा ने सेबी के नए अधिकारों तथा उसके कार्यक्षेत्र के पारदर्शिता के बारे में बताया।