नई दिल्ली - 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में पूर्व कैबिनेट सहयोगियों की ओर से पहले ही लपेटे जा चुके पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अब तत्कालीन ट्राई चेयरमैन प्रदीप बैजल ने भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। बैजल ने जल्द प्रकाशित होने वाली अपनी किताब ‘दि कंप्लीट स्टोरी ऑफ इंडियन रिफॉर्म्स-2जी पावर एंड प्राइवेट एंटरप्राइज’ में मनमोहन सिंह को घोटाले का जिम्मेदार ठहराते हुए लिखा है कि पूर्व पीएम ने उन्हें 2जी मामले में सहयोग न करने पर नुकसान उठाने की चेतावनी दी थी।
कई सालों तक 2जी और संपत्तियों के विनिवेश के मामले में जांच का सामना कर चुके बैजल ने कहा कि हमारे जैसे अधिकारियों की हालत होती है कि कुछ करें तब भी मुश्किल और कुछ न करें तब भी परेशानी। 2006 में रिटायर हुए बैजल ने अपनी किताब में पूरे घोटाले के लिए मनमोहन को जिम्मेदार ठहराते हुए लिखा है कि मैंने यूपीए-2 के दौरान बहुत से लोगों को चेताया था कि मेरे या अन्य लोगों से जो भी पूछताछ हो रही है, उसकी आंच प्रधानमंत्री तक भी जाएगी, क्योंकि हमने प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों के फैसलों को ही आगे बढ़ाया है।
यह अब सच साबित हो रहा है। ‘हाउ दि प्रॉब्लम्स बीगेन’ नाम से लिखे चैप्टर में बैजल ने दावा किया है कि उन्होंने 2004 में दयानिधि मारन को टेलिकॉम मिनिस्टर बनाने का विरोध किया था क्योंकि वह खुद एक ब्रॉडकास्टर भी थे और यह हितों के टकराव का मामला था, लेकिन तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया था। बैजल ने दावा किया कि मनमोहन ने दो समितियों को गठित किया था, जिनमें से एक के अध्यक्ष वह खुद थे और दूसरी की जिम्मेदारी उनके प्रधान सचिव पर थी।
मारन इन समितियों की बैठक में अधिकारियों को जाने से मना करते थे। मारन का कहना था कि वह खुद टेलिकॉम प्राइम मिनिस्टर हैं। बैजल ने लिखा है कि मारन ने धमकी दी थी कि यदि मेरे आदेशों का पालन नहीं करोगे तो नुकसान उठाना पड़ेगा और मुझे बाद में खामियाजा भुगतना भी पड़ा।