सियोल - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि एशिया की विकास यात्रा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की जिम्मेदारी अब भारत पर आई है और आर्थिक क्षेत्र में तेजी से उभर रहे इस देश को पूरा विश्व आशा की नई दृष्टि से देख रहा है। मोदी दक्षिण कोरिया में छठे एशियाई लीडरशिप फोरम को संबोधित कर रहे थे। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना तीन देशों का दौरा खत्म कर मंगलवार को कोरिया से भारत के लिए रवाना हो गए।
प्रधानमंत्री देर रात भारत पहुंचेंगे। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति पार्क गुइन हई, संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून और कतर के पूर्व अमीर की दूसरी पत्नी शेखा मोजाह की मौजूदगी में अपने संबोधन में इस शताब्दी में एशिया के एक प्रमुख शक्ति के रूप मे उभरने का उल्लेख करते हुए कहा कि इसकी शुरुआत जापान से हुई और इसके बाद चीन, दक्षिण कोरिया और दक्षिण पूर्व एशियाई देश इसका हिस्सा बने। उन्होंने कहा कि एशिया के विकास की इस यात्रा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब भारत पर आर्ई है।
उन्होंने भारत की 1.25 अरब जनसंख्या की चर्चा करते हुए कहा कि भारत की क्षमता पर कभी भी संदेह नहीं किया जा सकता। देश की सवा अरब जनता में 80 करोड़ युवा देश की ताकत और संसाधन हैं। उन्होंने कहा कि हम अपने इरादे-वादों को हकीकत में और आशा को विश्वास में बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत के विकास में प्रति वर्ष साढ़े सात प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी हो रही और भविष्य में इस दर के और बढऩे की पूरी उम्मीद है। श्री मोदी ने कहा कि पूरा विश्व एक स्वर में बोल रहा है कि भारत समस्त संसार के लिए उम्मीद की नई किरण है। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति एशिया की सफलता की कहानी होगी और इससे हमारे एशिया के विकास के सपने को साकार करने में मदद मिलेगी, क्योंकि एशिया तब और आगे बढ़ेगा, जब वह एक साथ बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि एशिया के दो चेहरे नहीं हो सकते, एक आशा एवं समृद्धि वाला और दूसरे वंचित एवं याचक। श्री मोदी ने पूरे विश्व के लिए खतरा बन चुके आतंकवाद के मुद्दे को उठाते हुए नेताओं से एकजुट होकर आतंकवाद और इसकी चुनौतियों से निपटने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद, एक देश के नागरिक द्वारा दूसरे देश में जाकर किए जाने वाले अपराधों, प्राकृतिक आपदा, आदि चुनौतियों से एशियाई देशों को मिल कर लडऩे की जरूरत है। जिस तरह से एशियाई देश समृद्ध और शक्तिशाली हुए हैं, उसी हिसाब से उन्हें विश्व के प्रति अपनी अहम जिम्मेदारियों को भी समझना होगा और वैश्विक मामलों में एक महत्ती भागीदारी के लिए आगे आना होगा।
प्रधानमंत्री ने एशियाई नेताओं को संयुक्त राष्ट्र संघ और सुरक्षा परिषद समेत वैश्विक संस्थाओं में बदलाव के लिए मिलकर काम करने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रतिद्वंद्विता से एशियाई देश प्रगति के पथ से दूर होगें और एक साथ मिलकर काम करके वे विश्व को सही आकार दे सकते हैं।