नई दिल्ली - सरकार ने बताया कि कई पूर्व एवं वर्तमान मुख्यमंत्रियों, संसद सदस्यों और उद्योगपतियों सहित करीब तीन लाख 90 हजार लोगों ने एलपीजी सब्सिडी छोड़ दी है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने आज राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान बताया कि 27 मार्च 2015 को नई दिल्ली में आयोजित ऊर्जा संगम 2015 नामक ऊर्जा सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'राजसहायता छोड़ें' अभियान की शुरुआत करते हुए कहा था कि संपन्न लोगों को राजसहायता त्याग देनी चाहिए ताकि गरीबों के कल्याण में मदद की जा सके।
प्रधान ने बताया कि इस अपील के बाद से करीब तीन लाख 90 हजार लोगों ने राज सहायता त्याग दी है जिनमें महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण, कई राज्यों के मुख्यमंत्री, संसद सदस्य, उद्योगपतियों से लेकर सामान्य लोग तक शामिल हैं उन्होंने प्रश्नकाल के दौरान बताया कि पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत एक साल के दौरान 20 रुपये से अधिक कम की गई है और ऐसा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के कारण किया गया। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत के बारे में पूर्ववर्ती सरकार की नीतियों को जारी रखा गया है।
प्रधान ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत घटने के कारण देश में पेट्रोल की कीमत घटा कर उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई, साथ ही गरीबों के कल्याण के लिए राशि भी जुटाई गई। उन्होंने माना कि पेट्रोलियम के टैंकर जब डिपो से रवाना होते हैं तो उनमे भरे पेट्रोलियम की मात्रा की माप की जाती है लेकिन डीलर तक पहुंचते पहुंचते अक्सर उसमें से उत्पाद की चोरी कर ली जाती है और माप भी नहीं लिया जाता। प्रधान ने कहा, 'नए मार्केटिंग प्लान के लिए एक समिति बनाई गई है जिसमें नवीनतम प्रौद्योगिकी की मदद से इस चोरी को रोका जाएगा