श्रीनगर/ रांची - जम्मू कश्मीर के मतदाताओं ने विधानसभा चुनाव में खंडित जनादेश दिया है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, जबकि दूसरे नंबर पर रही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की झारखंड में सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया। झारखंड में 81 में से भाजपा गठबंधन को 42 सीटें मिली हैं। जम्मू कश्मीर में सरकार किसकी बनेगी, यह सवाल उलझ गया है। क्योंकि कोई भी पार्टी बहुमत के आसपास भी नहीं फटकी है। कहने को जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस सत्ता से बाहर हो गई है। लेकिन उमर ने संकेत दिए कि उनकी पार्टी अपनी चिर-प्रतिद्वंद्वी पीडीपी को समर्थन दे सकती है।
उनकी सहयोगी रही कांग्रेस ने तो पूरे नतीजे आने से पहले ही पीडीपी का दामन थामने का इरादा जता दिया। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने गठबंधन की संभावना को लेकर पत्ते नहीं खोले, लेकिन संकेत जरूर दिये। उन्होंने कहा कि मौजूदा चुनाव में जनादेश नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन के खिलाफ है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि सभी विकल्प खुले हैं। भाजपा सरकार भी बना सकती है, किसी और पार्टी को सरकार बनाने के लिए समर्थन दे सकती है और सरकार में शामिल भी हो सकती है।
मुफ्ती मोहम्मद सईद की पीडीपी को 28 सीटों मिली हैं, लेकिन 87 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 16 और सीटें चाहिए थीं। भाजपा को 25 और नेशनल कॉन्फ्रेंस को 2 निर्दलीय विधायकों सहित 17 सीटें मिलीं। जबकि कांग्रेस को 12 सीटों से संतोष करना पड़ा। वहीं झारखंड में 81 में से 41 सीटें जीतकर भाजपा ने अपने बूते सरकार बनाने का रास्ता बना लिया है। पीडीपी के सामने भाजपा से गठबंधन करने या कांग्रेस एवं कुछ निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार चलाने का विकल्प है।