नई दिल्ली - गौरवशाली हिंदू सभ्यता के पुनर्निर्माण के संकल्प के साथ पहला ग्लोबल हिंदू कांग्रेस संपन्न हो गया। सम्मेलन में दुनिया के विभिन्न भागों में हिंदुओं के उत्पीडन के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने का निर्णय लिया गया। इसके लिए अगले वर्ष हेग में ग्लोबल हिंदू ह्यूमन राइट कांफ्रेस का आयोजन होगा। साथ ही हिंदू उद्योगपतियों को एकजुट करने और युवाओं में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए हर साल ग्लोबल हिंदू इकोनॉमिक फोरम का आयोजन किया जाएगा।
चार साल बाद अगला ग्लोबल हिंदू कांग्रेस अमेरिका में आयोजित किया जाएगा। 50 देशें से आए लगभग 1800 प्रतिनिधियों ने सात अलग-अलग विषयों पर तीन दिन तक विचार -विमर्श किया और 200 से अधिक वक्ताओं ने उन्हें संबोधित किया। लगभग सभी सत्रों में दुनिया के विभिन्न भागों में हिंदुओं के उत्पीडन और उनके साथ हो रहे भेदभाव का मुद्दा उठा। प्रतिनिधियों ने बताया कि किस तरह मलेशिया, इंडोनेशिया और श्रीलंका में हिंदुओं के साथ भेदभाव हो रहा है।
वहीं पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए प्रतिनिधियों ने उत्पीडन की दास्तां सुनाई। वक्ताओं का कहना था कि ईसाई और मुसलमानों के साथ उत्पीडन होने पर पूरी दुनिया में हंगामा होता है और मीडिया में भी उसे खूब कवरेज मिलता है। लेकिन अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं के उत्पीडन की चर्चा तक नहीं होती है। सम्मेलन में हिंदुओं के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए समेकित प्रयास करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए अमेरिका और हेग में दबाव समूह तैयार किया जाएगा। इस क्रम में हेग में अगले साल ग्लोबल हिंदू ह्यूमन राइट कांफ्रेंस का आयोजन किया जाएगा।
सम्मेलन में दुनिया के विभिन्न भागों में फैले हिंदू उद्यमियों को आपस में जोडने के लिए हर साल ग्लोबल हिंदू इकोनॉमिक फोरम का आयोजन किया जाएगा ताकि वे जरूरत पडने पर एक-दूसरे की मदद कर सकें। अगले साल लंदन में फोरम की बैठक होगी। सम्मेलन में हिंदू युवाओं में उद्यमिता बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने पर बल दिया गया। कुछ प्रतिनिधियों ने इसके लिए हिंदू वल्र्ड बैंक बनाने की जरूरत बताई जबकि कई लोग हिंदू उद्यमियों के लिए अलग से हिंदू चैंबर बनाने की मांग भी उठाई।
संस्कृत और जर्मन विवाद से इतर वक्ताओं ने हिंदुओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि दुनिया में सबसे अधिक निरक्षर लोग हिंदू समाज से ही आते हैं। अशिक्षा उनकी गरीबी की मूल वजह बन गई है लेकिन आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ उसमें हिंदू मूल्यों को भी शामिल करने पर बल दिया गया। इसके लिए अलग से हिंदू एजुकेशन बोर्ड के गठन की घोषणा की गई। शिक्षा के क्षेत्र में आगे के प्रयासों की रूपरेखा यही बोर्ड तय करेगा।