नई दिल्ली - भारत सरकार ने बृहस्पतिवार को पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदू और सिख शरणार्थियों के लिए कई रियायतों की घोषणा की। इनमें उन्हें भारत की नागरिकता देने में अपनाई जानेवाली प्रक्रिया गत छूट भी शामिल है। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने वर्ष 2009 के 31 दिसंबर के पहले भारत आए पाकिस्तान और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यक समुदाय के शरणार्थियों को नागरिकता के लिए हाथों हाथ आवेदन स्वीकार करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी।
नागरिकता पाने के पात्र इन आवेदकों को ऑनलाइन आवेदन करने में परेशानी हो रही थी। वे अब अपने पासपोर्ट के साथ खुद जिलाधिकारी या उपायुक्त कार्यालय में आवेदन जमा कर सकते हैं। शर्त यह है कि आवेदन करते समय इन आवेदकों का दीर्घकालिक वीजा वैध हो। इसके लिए नागरिकता नियमावली 2009 के नियम 38 के तहत अधिकारी के समक्ष एक शपथ पत्र दायर करना होगा।
ऐसे शरणार्थियों के बच्चे जो अपने माता-पिता के पासपोर्ट के आधार पर भारत में प्रवेश किए हैं वे भारत में रहना वैध हो जाने के बाद बगैर पासपोर्ट के भी भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऐसे शरणार्थियों के बच्चे यदि भारत में पैदा हुए हैं वे भी बगैर किसी पासपोर्ट के भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। इन बच्चों को संबंधित जिले के विदेशी पंजीयन कार्यालय (एफआरओ) में उसके भारत प्रवास को नियमित करने के लिए पंजीयन कराना होगा।
गृह मंत्रालय ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यक समुदाय के नागरिकों को भारतीय नागरिकता के लिए अपने आवेदन जमा करने में हो रही कठिनाइयों पर विचार करते हुए यह निर्णय लिया है। ज्ञातव्य है कि नरेंद्र मोदी ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान पश्चिम बंगाल और राजस्थान की रैलियों में कहा था कि यदि वह प्रधानमंत्री बनेंगे तो पाकिस्तानी और बांग्लादेशी हिंदू शरणार्थियों को भारतीय नागरिकों के समान माना जाएगा।