श्रीनगर - बडग़ाम में सेना की फायरिंग में दो छात्रों की मौत के विरोध में घाटी के नौगाम इलाके में गुस्सा भडक़ उठा। दोनों युवकों के अंतिम संस्कार के बाद गुस्साए लोगों ने पुलिसवालों पर पत्थर फेंके और घटना के विरोध में जमकर नारेबाजी की। इनकी सुरक्षाबलों से झड़प भी हुई। ये लोग इलाके में सुरक्षाकर्मियों के कैंप हटाने की मांग कर रहे थे। इन प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोडऩे पड़े। इलाके में कानून-व्यवस्था बरकरार रखने के लिए निषेधाज्ञा लगा दी गई है। लेकिन रुक-रुक कर झड़पें जारी रहीं।
सेना ने बडग़ाम फायरिंग की घटना की कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के आदेश दिए हैं। सोमवार शाम बडग़ाम जिले के चत्तरगाम इलाके में सेना को उस समय फायरिंग करनी पड़ी, जब रुकने का इशारा करने के बाद भी युवकों ने कोई ध्यान नहीं दिया। इस घटना में दो युवकों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए। सोपोर में बंकर पर ग्रेनेड फेंका बारामुला जिले के सोपोर इलाके में आतंकवादियों ने मंगलवार को सुरक्षाबलों के एक बंकर पर राइफल से ग्रेनेड दागा, लेकिन यह फट नहीं सका। 179 बटैलियन के बंकर की तरफ हुए इस हमले में ग्रेनेड को नष्ट करने के लिए बम निरोधक दस्ता बुलाया गया। ग्रेनेड के नियंत्रित विस्फोट से कोई नुकसान नहीं हुआ।
श्रीनगर में कर्फ्यू जैसे हालात जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में मुहर्रम पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियात के तौर पर कर्फ्यू जैसी बंदिशें लगा दी गईं। श्रीनगर के डीएम ने बताया कि पुराने शहर वाले पांच थाना इलाकों में यह बंदिशें लगाई गईं। आपको बता दें कि श्रीनगर में 1990 में आतंकवाद के मद्देनजर सुरक्षा कारणों से मुहर्रम के जुलूसों पर रोक लगा दी गई थी। लेकिन पीडीपी की अगुआई वाली सरकार ने 2003 में पुराने शहर के जादीबल जैसे इलाकों में मुहर्रम जुलूस निकालने की अनुमति दी थी।