देहरादून - ऊर्जा प्रदेश व पर्यटन प्रदेश भले ही उत्तराखण्ड राज्य को कहा जाये लेकिन जिस तरह से राज्य के किसान अपनी मेहनत से पसीना बहाकर इस राज्य में कृषि को नया मुकाम देने पर जुटे हुए हैं, ऐसे में वह दिन दूर नहीं जब यह प्रदेश कृषि प्रदेश के रूप में देश में स्थान बना सकता है। यह बात प्रदेश के कृषि मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने इंदिरा नगर स्थित हार्क कार्यालय में आयोजित कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि कही।
उन्होंने कहा कृषि ही एक मात्र साधन है जो प्रदेश से बेरोजगारी के साथ-साथ पलायन को भी रोक सकती है। उन्होंने कहा आज खाद्यान्न के क्षेत्र में हम आत्मनिर्भर हैं जबकि मसाले, दलहन के क्षेत्र में आत्मनिभर होने की जरूरत है। इस अवसर पर कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रदर्शन करने वाले 17 कृषकों को सम्मानित किया गया। साथ ही रंवाई घाटी में कृषि की मिसाल पेश करने वाले वयोवृद्ध किसान युद्धवीर सिंह को ‘कृषि पितामह’ सम्मान से नवाजा गया। युवा किसान आज स्थानीय किसानों के लिए एक मार्गदर्शक हैं।
इस अवसर पर उन्हे किसान मित्र सम्मान से नवाजा गया। वहीं सम्मानित किये गये उत्तरकाशी के मुलाणा गांव निवासी सुरेश रमोला ने मटर व टमाटर से खेती से कमाए चार लाख रूपये तक कमाये। इन्हें किसान सम्मान पत्र से नवाजा गया इसके अलावा किसान सम्मान से मोहन सिंह, मंजियाली के श्रीचंद्र राणा, थली के दीवान सिंह, सुनारा की भगवानी देवी, मुराडी की राजकुमारी, जिलासू कर्णप्रयाग की गुड्डी देवी सहित दलीप सिंह रावत, गजे सिंह नेगी, मथुरा प्रसाद त्रिपाठी, सूरजमणि मैंदोल और जयेंद्र सिंह राणा को सम्मानित किया गया।