शिमला - मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह आज केंद्रीय वन, पर्यावरण व सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जाबड़ेकर से बैठक की। इस दौरान प्रदेश के विभिन्न प्रोजेक्ट्स को लेकर चर्चा हुई। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के कड़े नियमों के चलते प्रदेश को सडक़ व अन्य परियोजनाओं के लिए जल्द मंजूरी नहीं मिल पाती है।
यही नहीं, हाइडल प्रोजेक्ट्स की बात हो या फिर अन्य परियोजनाओं की, प्रदेश को विशेष श्रेणी राज्य का दर्जा हासिल होने के बावजूद मैदानी इलाकों के साथ ही खड़ा किया जाता है। मुख्यमंत्री पहले के दौरों के दौरान भी स्पष्ट कर चुके हैं कि हिमाचल के लिए अलग से मापदंड निर्धारित हों, ताकि विकासात्मक योजनाओं के क्रियान्वयन में दिक्कतें न आएं। पहले की सरकारें भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाती रही हैं।
बावजूद इसके हिमाचल के लिए कोई भी छूट नहीं मिल सकी।खनन पर भी होगी चर्चाकेंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने हिमाचल को पांच हेक्टेयर से कम खनन की अनुमति न देने को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में हलफनामा दायर किया है। सरकार वन मंत्रालय से दो हेक्टेयर तक के लिए प्रदेश को ही अधिकृत करने का प्रस्ताव पेश कर चुकी है। इस पर अभी भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उल्टा एनजीटी में हलफनामा देकर मंत्रालय ने प्रदेश की दिक्कतें बढ़ा दी हैं। यह मामला भी मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से उठाया हैं।