नई दिल्ली - उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि देश के सभी मानवाधिकार आयोग फेल हैं। आयोग बामुश्किल ही मानवाधिकार का संरक्षण कर रहे हैं। शीर्ष अदालत ने मानवाधिकार आयोग को दंतविहिन बताया है। न्यायमूर्ति टी. एस. ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि देश के सभी मानवाधिकार आयोग, चाहे वह राष्ट्रीय और राज्य स्तर का हो, सेवानिवृत्त जजों के लिए महज एक पद भर है। उनके पास शक्तियां या अधिकार सीमित हैं। जब तक आयोग के पास दंड देने की शक्ति या अधिकार न हो तो इसका उद्श्य नहीं पूरा नहीं होता। आयोग सिर्फ सिफारिश करने के अधिकार तक सीमित है।
पीठ ने कहा कि मानवाधिकार आयोग का पद मिलने के बाद सेवानिवृत्त जजों को घर, दफ्तर और कार मिल जाती है लेकिन मानवाधिकार की बात करें तो उनके पास क्या शक्तियां हैं। कई राज्यों में तो आयोग तक नहीं है और जहां हैं वहां भी कर्मचारियों का किल्लत है। न्यायमूर्ति टी.एस. ठाकुर ने कहा, आखिर आयोग कौन सा उद्देश्य पूरा कर रहा है।