नई दिल्ली 1 फरवरी : सभी प्राकृतिक आपदाओं में भूकम्प अपनी अनिश्चितता के कारण अधिक गंभीर और विध्वंसक होता है। भारत की 58 प्रतिशत भूमि मध्यम से गंभीर भूकम्पी ख़तरों के क्षेत्र में आती है। हालांकि भूकम्प की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती, लेकिन जान-माल पर पड़ने वाले प्रभावों को बेहतर तैयारी और सजगता के जरिए कम किया जा सकता है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने भूकम्प के प्रभावों को कम करने के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी उपायों के साथ-साथ प्रभावी प्रशासन की वकालत की है। इस क्रम में एनडीएमए ने आपदा से होने वाले नुकसान के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए कई मॉक ड्रिल शुरू करने की योजना तैयार की थी, जिसमें भूकम्प की घटना के समय जान-माल की सुरक्षा के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर जोर दिया गया है। इस क्रम में बृहत स्तर पर एक मॉक ड्रिल का आयोजन दिल्ली में 15 फरवरी, 2012 को किया गया।
भूकम्प के दौरान तैयारी अभियान जारी रखते हुए, भारत के उत्तरी पश्चिमी क्षेत्रों को इस आपदा से निपटने की तैयारी में मदद देने के लिए एक अभ्यास की तैयारी की गई है। एनडीएमए हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और संघ शासित प्रदेश चंड़ीगढ़ के राज्य प्रशासनों के सहयोग से चंड़ीगढ़, मोहाली और पंचकुला सहित शिमला में 13 फरवरी, 2013 को बृहत मॉक ड्रिल का आयोजन कर रहा है। इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य भूकम्प के दौरान विभिन्न राज्यों में पड़ने वाले प्रभावों की प्रतिक्रिया में प्रभावी समन्वय से संबंधित क्षमता प्रणाली की जांच करना है। यह ड्रिल एक साथ चंड़ीगढ़, पंचकुला, मोहाली और शिमला के 60 विभिन्न स्थानों पर आयोजित किया जाएगा, जिसमें एनडीएमए के विशेषज्ञ द्वारा सभी आवश्यक तैयारी उपलब्ध कराये जाने के अलावा तीनों राज्यों और संघ शासित प्रदेश, चंड़ीगढ़ में प्रत्येक को 36 लाख रुपये की सहायता राशि इस अभियान के लिए दी गई है।
एनडीएमए सदस्य श्री वि. के. दुग्गल की अध्यक्षता में एक अंतिम समन्वय बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें एनडीएमए के अन्य सदस्य श्री एच. के. गुप्ता और श्री के. एम. सिंह सहित तीनों राज्यों और संघ शासित प्रदेश चंड़ीगढ़ के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। श्री दुग्गल ने चंड़ीगढ़ में केंद्रीय समन्वय केंद्र और शिमला में नियंत्रण कक्ष के जल्द स्थापना की जरूरत पर जोर दिया। संघ शासित प्रदेश चंड़ीगढ़ द्वारा केंद्रीय समन्वय केंद्र के लिए ढांचागत सहायता और हिमाचल प्रदेश सरकार को शिमला में नियंत्रण कक्ष के लिए ढांचागत सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। यह नियंत्रण कक्ष 10 फरवरी, 2013 तक स्थापित कर लिए जाएंगे। नागरिक सुरक्षा स्वयंसेविओं के साथ-साथ सभी ईएसएफ कार्यकर्ता, प्रमुख राज्यों/ केंद्र सरकार के विभागों और रक्षा विभाग के स्वतंत्र पर्यवेक्षक इस बृहत मॉक ड्रिल अभ्यास में भाग ले रहे है। 30 दल (भंटिडा, नोएडा और गांधीनगर एनडीआरएफ बटालियन प्रत्येक में से 10 दल) 30 स्थानों पर किए जाने वाले बृहत मॉक ड्रिल अभ्यास में भाग लेंगे। एनडीएमए के सदस्य और सहायता अधिकारी इस अभ्यास को सुगम बनाने के लिए समन्वय सुनिश्चित करेगे।
एक अंतिम हॉटवॉश 14 फरवरी, 2013 को चार जिले चंड़ीगढ़, मोहाली, पंचकुला और शिमला में किया जाएगा।
संवाददाता सम्मेलन दो चरणों में किया जाएगा (1) इस अभ्यास के अयोजन से पहले दोपहर बाद 12 फरवरी, 2013 को और (2) 13 फरवरी, 2013 को मॉक ड्रिल अभ्यास के बाद।