नई दिल्ली - ओडिशा आपदा निवारण परियोजना को 153 मिलियन डॉलर की सहायता के लिए आज भारत सरकार और विश्व बैंक (अंतर्राष्ट्रीय विकास संघ-आईडीए) के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
वित्त पोषण समझौते पर भारत सरकार की तरफ से आर्थिक मामलों के विभाग में संयुक्त सचिव निलय मितास और विश्व बैंक की तरफ से कार्यकारी निदेशक (भारत) मिशेल हैने ने हस्ताक्षर किए। परियोजना समझौते पर उड़ीसा सरकार की तरफ से अपर मुख्य सचिव उपेंद्रनाथ बहरा द्वारा हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के साथ ही राज्य सरकार और विश्व बैंक के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
परियोजना का उद्देश्य ओडिशा के लक्षित समुदायों के लिए सार्वजनिक सेवाओं और बेहतर आवास को पुनर्बहाल करना और आपातकाल में संकट के समय में राज्य संस्थाओं को तेजी से प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने की क्षमताओं में बढ़ोत्तरी करना है।
परियोजना से प्रत्यक्ष रूप से लाभ लेने वालों में गंजाम, पुरी और खोरथा के तूफान द्वारा प्रभावित क्षेत्र की तटीय आबादी शामिल है, यह आवास पुनर्निर्माण का एक भाग होगा। जिमसें लगभग 15 हजार और जिसका 50 प्रतशित महिलाएं हैं और 30 हजार लोग बहरमपुर के चयनित झुग्गी क्षेत्रों के निवासी हैं और जिसका 50 प्रतिशत महिलाएं हैं इसके अतिरिक्त बहरमपुर की लगभग 3.5 लाख की कुल आबादी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर मास्टर प्लान में उम्मीद किए जा रहे सुधार से लाभान्वित होगी, ठीक उसी तरह राज्य के कुल 42 मिलियन निवासी भी तबाही के प्रत्युत्तर और प्रबंधन की क्षमता में बढ़ोत्तरी का लाभ प्राप्त करेंगें।
परियोजना के पांच घटक होंगे जो इस प्रकार हैं : 1. लोचदार आवास निर्माण और समुदाय इन्फ्रॉस्ट्रक्चर 2. बहरमपुर में शहरी इन्फ्रॉस्ट्रक्चर 3. तबाह जोखिम प्रबंधन के लिए क्षमता निर्माण 4. क्रियान्वयन सहायता और 5. संभावित आपातकाल प्रत्युत्तर
परियोजना तबाही जोखिम प्रबंधन प्रणाली में संवृद्धि पर केंद्रित है। इसके अतिरिक्त यह प्राकृतिक आपदा के प्रभाव के लिए तैयार संस्थागत क्षमता निर्माण में भी सहायक होगी और लोगों के लिए प्राकृतिक आपदाओं से स्वयं को बचाने और तेजी से उससे वापसी करने में भी सहायक होगी।
परियोजना का क्रियान्वयन पांच वर्ष के कार्यकाल में होगा। ओडिशा सरकार परियोजना को क्रियान्वित करने वाली एजेंसी होगी।