जम्मू-कश्मीर - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के बारामुला जिले में स्थित एनएचपीसी के 240 मेगावाट क्षमता वाला उरी-2 पावर स्टेशन आज राष्ट्र को समर्पित किया। इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एन.एन. वोहरा, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, भारत सरकार के बिजली, कोयला और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल और बिजली मंत्रालय एवं एनएचपीसी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
बिजलीघर को राष्ट्र को समर्पित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि परियोजना राष्ट्र को प्रकाशमान करने की सरकार की प्रतिबद्धता को पूरा करने की ओर एक कदम है। उन्होंने कहा कि बिजली उत्पादन समाज के आर्थिक विकास के लिए अति आवश्यश्क है। इस अवसर पर बोलते हुए उन्होंने ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में पर्यावरण के अनुरूप विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पास 1400 मेगावाट तक की जल विद्युत बिजली संभावना है, जिसको काम में लिए जाने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने उरी-2 पावर स्टेशन को पूर्ण करने से संबंधित सभी लोगों को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। भारत सरकार के बिजली, कोयला और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री पीयूष गोयल ने उरी-2 पावर स्टेशन को राष्ट्र को समर्पित करने के लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद किया। उन्होंने परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए एनएचपीसी को बधाई दी और पनबिजली विकास के लिए की गई पहल के लिए एनएचपीसी की सराहना भी की।
उरी-2 पावर स्टेशन बारामुला की उरी तहसील के सलामाबाद गांव के निकट झेलम नदी की धारा पर बना 240 मेगावाट क्षमता का लगभग 2300 करोड़ रुपये की लागत से बना बिजली घर है। इस परियोजना के प्रमुख बिंदुओं में एक हैड रेग्युलेटर के साथ 157 मीटर लम्बाई वाला और 43.7 मीटर ऊंचाई वाला कंक्रीट ग्रेविटी बांध, लगभग 9 किलोमीटर लम्बाई वाली जल संचालक प्रणाली, जिसमें एक ओपन चैनल, एचआरटी, टीआरटी और एक भूमिगत बिजलीघर भी शामिल है। 118 मीटर का नेट हैड का 240 मेगावाट की स्थापित क्षमता के साथ उपयोग हो रहा है, जिसमें 60 मेगावाट की 4 इकाइयां शामिल हैं, जोकि वार्षिक 1123 एमयू बिजली का उत्पादन करेंगी।
इस परियोजना के निर्माण के दौरान इस क्षेत्र में ढांचागत विकास भी हुआ। स्थानीय लोगों को एनएचपीसी और उसके साथ परियोजना में काम करने वाली कंपनियों में रोजगार भी मिला। एनएचपीसी द्वारा राहत और बचाव कार्यों और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत विभिन्न विकास गतिविधियां भी चलाई गई। स्थानीय लोगों के लिए परिय़ोजना स्थल पर शीघ्र ही आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित 20 बिस्तरों वाला परियोजना अस्पताल भी उपलब्ध होगा। कुछ महत्वपूर्ण पहलकदमियां भी की गई हैं जिसमें शामिल है बोनियार के निकट चेहला में 300 लाख रूपये की लागत से एक खेल स्टेडियम का निर्माण और 50 लाख रूपये की लागत से बनने वाले उरी बस स्टैंड को स्वीकृति।
जम्मू-कश्मीर के सम्पूर्ण विकास की प्रतिबद्धता के रूप में एनएचपीसी ने राज्य में 7 आईटीआई केन्द्रों रियासी, रामबन, कारगिल, लेह, किश्तवाड़, बंदिपोरा और उरी के सुधार को भी करने का दायित्व लिया है। इसके अतिरिक्त एनएचपीसी गंदरबल के निकट कंगन में एक जल विद्युत प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना भी करेगा जिसके लिए एनएचपीसी और जम्मू-कश्मीर राज्य बिजली विकास निगम (जेकेएसपीडीसी) के मध्य समझौते पर हस्ताक्षर हो गये हैं। कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व पहल के अंतर्गत एनएचपीसी मार्च 2014 तक राज्य में 984 लाख रूपये खर्च कर चुका है और आगे भी वर्तमान वित्तीय वर्ष के दौरान 1268 लाख रूपये खर्च करने का प्रस्ताव है।
जल विद्युत परियोजनाओं के विकास के क्षेत्र में एऩएचपीसी आज देश का एक प्रमुख संगठन है। 6507 मेगावाट क्षमता वाले स्थापित संयत्रों का परिचालन हो रहा है, जिसमें 1520 मेगावाट क्षमता वाली दो परियोजनाएं संयुक्त उपक्रम के रूप में शामिल है। चार परियोजनाएं (3290 मेगावाट) निर्माणाधीन हैं। देश में जल विद्युत परियोजनाओं को चलाने में एनएचपीसी की तकनीकी क्षमताएं अतुलनीय है।