राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के अंतर्गत राज्यों को महिलाओं व बच्चों पर विशेष ध्यान देते हुए लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं देने को मजबूत बनाने के उद्देश्य से निधि जारी की गई है। हालांकि स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय का गांवों में महिला सशक्तीकरण के लिए कोई विशेष कार्यक्रम नहीं है पर प्रत्यायित सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा), गांवों का स्वास्थ्य संबंधी खाका, साफ-सफाई व पोषण समिति (वीएचएसएनसी) जिसमें कम से कम पचास प्रतिशत महिला सदस्य हों, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम आदि सहित जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई), जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (जेएसएसके), सामुदायिक प्रक्रिया जैसी योजनाएं महिलाओं के सशक्तीकरण में योगदान देती हैं।
महिला व बाल विकास मंत्रालय का राष्ट्रीय महिला सशक्तीकरण मिशन के संबंध में योजना की कवरेज को प्रदर्शित करने के लिए प्रायोगिक ‘’कनवर्जेन्स मॉडल’’ राजस्थान के पाली जि़ले में 150 ग्राम पंचायतों के स्तर के केन्द्रों द्वारा सितम्बर, 2011 से चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य व पोषण, सामाजिक, आर्थिक व राजनैतिक अधिकारों जैसे कार्यक्रमों व सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता पैदा करने व महिलाओं को प्रभावित करने वाले सामाजिक विषयों को विचार-विमर्श के लिए सामुदायिक मंच पर लाने व महिलाओं को निर्णायक भागीदारी के लिए तैयार करने के लिए ग्राम, तहसील व जिला स्तर पर महिला कन्वर्जेन्स व सुविधा केन्द्र स्थापित किये गए हैं।
इस मिशन के अंतर्गत विभिन्न, जिलों में 19 पूर्णशक्ति केन्द्रों (पीएसके) को मंजूरी दी गई है। ऐसे दो केन्द्र जिला मालदा, पश्चिमी बंगाल व राजस्थान के बूंदी जिले में स्थापित किये गए हैं। ग्राम स्तर पर (पीएसके) के अंतर्गत गतिविधियां शुरू होनी बाकी हैं। पीएसके मॉडल को लागू करने के लिए वित्तीय वर्ष, 2011-12 और 2012-13 के दौरान 3,23,84,000 रुपए की राशि जारी की गई 31 मार्च, 2013 तक 1,38,90,886 रुपए की राशि का उपयोग किया गया है।
हालांकि कुछ राज्यों द्वारा एनआरएचएम निधि का बहुत कम उपयोग किया गया पर कोई भी ऐसा राज्य नहीं है, जो कि एनआरएचएम निधि का प्रयोग बिल्कुल भी नहीं कर रहा है।
यह जानकारी आज राज्यसभा में केन्द्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नबी आजाद ने दी।