केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने कहा है कि बढ़ती मंहगाई को देखते हुए इस वर्ष एक अप्रैल से मनरेगा मजदूरी दर में बढ़ोतरी की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में इस हफ्ते से शुरू हो रहे संसद के आगामी सत्र में अधिसूचना रखी जाएगी।
जयराम रमेश ने नौवें मनरेगा दिवस पर अपने संबोधन में कहा कि मनरेगा मजदूरी दर को पहले से ही उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जोड़ा गया है और इसका वार्षिक संशोधन भी किया जाता है। रमेश ने विभिन्न राज्यों से प्राप्त सुझावों का जिक्र करते हुए कहा कि मनरेगा मजदूरी दर और न्यूनतम मजदूरी दर में समानता की आवश्यकता है क्योंकि मनरेगा मजदूरी दर कम है और बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल एवं राजस्थान जैसे 14 राज्यों में न्यूनतम मजदूरी के मुकाबले ग्रामीण मजदूरी दर कम है। उन्होंने कहा कि इसे लागू करने के लिए मनरेगा अधिनियम में संशोधन किए जाने की आवश्यकता है। एक विशेषज्ञ समिति इस मामले को देख रही है। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह करते हुए कहा कि वे मनरेगा योजना के तहत अपनी भूमि को समतल बनाने एवं सिंचाई परियोजनाओं को शुरू करने के कार्यों को अपनाने के लिए छोटे एवं सीमांत किसानों को प्रोत्साहित करें तथा इस मामले में उनकी मदद भी करें। उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि अभी तक इस प्रावधान का फायदा मात्र दस प्रतिशत किसानों को ही मिला है। उन्होंने अधिकारियों से यह आह्वान भी किया कि मनरेगा श्रमिकों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे में लाया जाए क्योंकि इस समय इस योजना के दायरे में मात्र 15 से 20 प्रतिशत श्रमिक ही आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2014-15 को मनरेगा संगम वर्ष (कनवर्जेन्स) के रूप में मनाया जाना चाहिए।
इस मौके पर ग्रामीण विकास राज्य मंत्री प्रवीण जैन आदित्य ने कहा कि मनरेगा ग्रामीण भारत में एक क्रांति लाया है और इसकी वजह से ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर मजदूरों का पलायन रूक गया है। उन्होंने कहा कि विश्व की इस सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार योजना से इस वर्ष अब तक 3 करोड़ 80 लाख परिवारों को फायदा हुआ है। उन्होंने कहा कि इसके क्रियान्वयन में व्याप्त भ्रष्टाचार से लड़ना एक बड़ी चुनौती है लेकिन यह राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है।
ग्रामीण विकास राज्य मंत्री लालचंद कटारिया ने कहा कि मनरेगा से टिकाऊ संपत्ति का सृजन हुआ है और जलोत्सारण योजनाओं से भूजल के पुन: भरण के बूते सिंचित भूमि का विस्तार करने में मदद मिली है। उन्होंने कहा कि इस योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय ने विभिन्न मंत्रालय एवं विभागों के बीच समायोजन की एक प्रक्रिया शुरू की है।
योजना आयोग के सदस्य मिहिर शाह ने कहा कि पिछले तीन-चार वर्ष में मनरेगा को काफी लचीला बनाया गया है और राज्यों के विशेष विवरण के अनुसार इसमें 23 नए कार्यों को भी शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि सामाजिक लेखा परीक्षण से काफी हद तक भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के पूरी तरह अमल से बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाएगी।
इस मौके पर ग्रामीण विकास सचिव एल सी गोयल ने कहा कि मंत्रालय ग्रामीण रोजगार योजना के लिए नए प्रयासों पर काम कर रहा है। इन प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को अस्मिता और आत्मसम्मान के साथ जीना सिखाया है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों को मजबूत करके मनरेगा ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और सुदृढ़ बनाया है।
इस मौके पर रोजगार योजना में बेहतर प्रयासों एवं नवाचारों के लिए कुल मिलाकर 47 पुरस्कार वितरित किए गए।